Monday, April 14, 2014

प्रो. नवल किशोर चौधरी ने माले प्रत्याशी राजू यादव को वोट देने की अपील की

महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेवार नीतियों को बदलने के लिए माले के राजू यादव को वोट दें: प्रो. नवल किशोर चौधरी 

प्रो. नवल किशोर चौधरी समेत शहर के कई जाने-माने बुद्धिजीवियों ने एक संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त किए
राजू यादव के समर्थन में समर्थन में उतरे प्रबुद्ध नागरिक

(इस प्रेस रिलीज और संगोष्ठी की तस्वीर को आज किसी अखबार ने नहीं छापा. आरा के पेज पर भी मोदी के विज्ञापन हैं. मुझे तो जैक लन्दन के उपन्यास 'आयरन हील" की याद आ रही है.)
आरा: 13 अप्रैल 2013 
‘समाजवाद, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता- देश के संविधान के जो मौलिक सिद्धांत हैं, वे आज खतरे में हैं। समाजवाद का मतलब पूंजीवाद नहीं हो सकता, लेकिन आज भाजपा-कांग्रेस और उनकी सहयोगी पार्टियों ने पूंजीवाद को बढ़ावा देते हुए बाजार को खुली छूट दे दी है। इन पार्टियों का ढांचा बिल्कुल लोकतंत्रविरोधी है। लोजपा, राजद, द्रमुक, सपा जैसी पार्टियों के भीतर कांग्रेस जैसा परिवारवाद चल रहा है, तो नीतीश कुमार और ममता बनर्जी की पार्टियों में तानाशाही कायम है।’ आज प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. नवल किशोर चौधरी ने माले प्रत्याशी राजू यादव के समर्थन में आयोजित आरा शहर के प्रबुद्ध नागरिकों की एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए यह कहा। 
प्रो. नवलकिशोर चौधरी ने कहा कि भाजपा को चलाने वाली आरएसएस न तो लोकतांत्रिक है और न ही धर्मनिरपेक्ष है। मोदी जो महंगाई घटाने का दम भर रहे हैं, वे क्या बाजार की शक्तियों को नियंत्रित कर देंगे? जब उत्पादन और रोजगार बढ़ाएंगे नहीं, तो कीमतों पर नियंत्रण कैसे करेंगे? उन्होंने जोर देकर कहा कि जो सरकार बाजार और पूंजीपतियों पर नियंत्रण नहीं कर सकती, वह समाज की असमानता और आर्थिक गैरबराबरी को भी दूर नहीं कर सकती। इनके पास भ्रष्टाचार के निंयत्रण की कोई नीति नहीं है। ये शिक्षा को बेहतर नहीं बना सकते। ये मनमोहन सिंह की ही नीतियों को बढ़ाने वाले हैं। इसलिए भाजपा-कांग्रेस की नीतियों में बदलाव के लिए आरा से जो आवाज उठी है, उसका जोरदार समर्थन किया जाना चाहिए। राजू यादव को वोट देने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आरा से वे मतदाता होते, तो वे राजू यादव को ही अपना वोट देते। वे ऐसे सांसद होंगे, जिन तक जनता अपनी समस्याएं लेकर आसानी से पहुंच सकती है। 
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रो. रामतवक्या सिंह ने कहा कि संसद में जनता की आवाज को भेजना बहुत जरूरी है। एक जुझारू सांसद भी संसद की तस्वीर बदल सकता है। अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष राघवेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि विधायिका पूंजीवादी शक्तियों का गढ़ बन गई है, उसमें जनता का सच्चा प्रतिनिधि भेजना बेहद जरूरी है। प्रो. विश्वनाथ राय ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से सिर्फ कम्युनिष्ट ही लड़ सकते हैं। जसम के राष्ट्रीय सहसचिव कवि जितंेद्र कुमार ने कहा कि सांप्रदायिक फासीवादी राजनीति का जवाब अवसरवादी और कुनबापरस्त राजनीति नहीं हो सकती। मौकापरस्त गठबंधनों के जरिए उन्हें नहीं रोका जा सकता। उनको तो जनसंघर्ष की ताकतें ही रोक सकती हैं। 
जैन काॅलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. पारसनाथ सिंह ने विस्तार से चुनावों के इतिहास पर बोलते हुए कहा कि संविधान चलाने की जिम्मेवारी लेने वाली पार्टियां उसे लागू करने में विफल हो चुकी हैं, लेकिन निराश होने के बजाए बदलाव के लिए लड़ने वाली पार्टियों का साथ देने की जरूरत है। वीर कुंवर सिंह वि.वि. हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रवींद्रनाथ राय ने कहा कि मीडिया एक ही पार्टी के प्रचार का माध्यम बन गयी है। गुजरात के विकास के बारे में झूठे दावे प्रचारित किए जा रहे हैं। भाजपा-कांग्रेस दोनों पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए काम कर रही हैं और दोनों सांप्रदायिक धुव्रीकरण की राजनीति करती हैं। इसलिए आज जरूरत यह है कि समाज के विकास और कल्याण के लिए जमीनी स्तर पर लड़ने वाली पाटियों के साथ खड़ा हुआ जाए, यही बुद्धिजीवी होने  की सार्थकता होगी। अधिवक्ता आनंद वात्सायायन ने कहा कि संसद में ऐसे व्यक्ति को भेजना जरूरी है, जो हमारी समस्याओं को जानता हो और उसके लिए लड़ सकता हो। इस कसौटी पर राजू यादव बिल्कुल खरे हैं। संगोष्ठी में फ्रेंच शोधार्थी ज्यां थाॅमस ने भी अपने विचार रखे। 
संगोष्ठी का संचालन कवि सुनील चौधरी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता अमित कुमार बंटी ने किया। इस मौके पर आइसा महासचिव अभ्युदय, रचना समेत कई छात्र-नेता, बुद्धिजीवी, साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी भी मौजूद थे।
संगोष्ठी के पहले आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रो. नवलकिशोर चौधरी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि भाकपा-माले ही है, जो संविधान की मूल प्रस्थापनाओं के प्रति प्रतिबद्ध है। वही है जो उन मूल्यों के लिए संघर्ष चलाती है। जिस तरह की कारपोरेटपरस्त नीतियां देश में कांग्रेस-भाजपा और उनके सहयोगी दलों के द्वारा चलाई जा रही हैं, उनके खिलाफ संघर्ष चलाने वाली एकमात्र पार्टी भाकपा-माले हैं, यही पार्टी है जो मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेवार इन नीतियों को बदलने का संघर्ष चला रही है। माले के उम्मीदवार नौजवान हैं, छात्र-नौजवानों के आंदोलनों का नेतृत्व करते रहे हैं, संसद में नीतियों को बदलने के लिए ऐसे ही उम्मीदवार को सांसद के रूप में चुना जाना चाहिए। 
आरा शहर के 71 प्रबुद्ध नागरिकों ने इसके पहले राजू यादव के पक्ष में अपील का एक पर्चा जारी किया है, अब इस संगोष्ठी से राजू यादव के समर्थन में चल रहे प्रबुद्ध नागरिकों की मुहिम को और बल मिला है। 

Saturday, April 12, 2014

राजू यादव के समर्थन में आरा के प्रबुद्ध नागरिकों की अपील


माले की तमाम कमिटियां और इससे जुड़े सारे जनसंगठन राजू यादव के प्रचार में लगे हैं

माले का चौतरफा चुनाव प्रचार जारी है: का. कुणाल 

आरा: 12 अप्रैल 2014
आरा में अपने प्रत्याशी के चुनाव प्रचार के लिए कैंप किए हुए भाकपा-माले के राज्य सचिव का. कुणाल ने कहा है कि पूरे लोकसभा में पार्टी का जमीनी स्तर पर जोरदार प्रचार अभियान चल रहा है
दैनिक आज १३ अप्रैल 
प्रभात खबर 
केंद्रीय कमेटी का. कृष्णदेव यादव, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, राज्य कमेटी सदस्य का. सुदामा प्रसाद, जिला सचिव का. जवाहरलाल सिंह समेत तमाम जिला कमेटी सदस्य, इनौस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का. असलम, आइसा के राज्य सचिव का. अजित कुशवाहा, आइसा जिला अध्यक्ष का. सबीर, ऐपवा की शोभा मंडल, ऐक्टू के यदुनंदन चैधरी, बिहार राज्य कर्मचारी महासंघ-गोप गुट के मदन प्रसाद और उमा यादव, रिक्शा टमटम, टेंपू यूनियन के नेता का. गोपाल प्रसाद, फुटपाथी दूकानदार संघ सह निर्माण मजदूर यूनियन के बालमुकुंद यूनियन, आॅल बिहार प्रोग्रेसिव एडवोकेट एसोसिएशन के अमित कुमार बंटी, माले नगर सचिव का. दिलराज प्रीतम, वार्ड पार्षद विद्यावती देवी, सुधा देवी, लल्लू कुमार, नगर कमेटी सदस्य सत्यदेव, दीनानाथ सिंह, राजनाथ पासवान, सुरेश पासवान, खेमस के कामता प्रसाद सिंह, अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष चंद्रदीप सिंह, पूर्व विधायक अरुण सिंह समेत तमाम प्रखंडों और ब्रांचों के सचिव इस चुनाव अभियान में लगे हैं।
दैनिक हिन्दुस्तान 
इंकलाब नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि राय अगिआंव में तथा राज्य स्थायी समिति के सदस्य का. संतोष सहर शाहपुर  में, का. क्यामुद्दीन आरा मुफस्सिल में तथा का. महेश और राजू रंजन बड़हरा में, संदेश में परशुराम सिंह, सहार में मदन जी, तरारी में विंदेश्वरी जी, चरपोखरी में रमेश और रघुवर पासवान, पीरो में विजय जी आदि खास तौर पर चुनाव के अभियान की कमान संभाले हुए हैं। आइसा ने करीब साढ़े तीन सौ छात्र-नौजवानों को चुनाव प्रचार के लिए संगठित किया है, जो पिछले दो सप्ताह से पूरावक्ती कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं।
कई दिनों के बाद जागरण में एक छोटी सी खबर 
सांस्कृतिक संगठन हिरावल और युवानीति के कलाकार भी प्रचार में जुटे हुए हैं। हर रोज नए-नए कार्यकर्ता और प्रचारक पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं। पार्टी की सभाओं और बैठकों मे उत्साह के साथ उमड़ती जनता को देखकर इस बार लगता है कि माले 1989 के इतिहास को दुहराएगा और राजू यादव को यहां से जीत हासिल होगी। 
कल से पार्टी के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य दो दिवसीय दौरा शुरू हो रहा है। जिसमें वे आठ सभाओं को संबोधित करेंगे। 

जिसने अपनी पत्नी का सम्मान नहीं किया, वह देश की महिलाओं का सम्मान कैसे करेगा?: ऐपवा



भाजपा-सपा दोनों खापवादी मानसिकता से ग्रस्त हैं: ऐपवा
मुलायम सिंह यादव और अबू आजमी के बयानों की भी निंदा
(आरा में यह प्रेस रिलीज दिया गया था, जिसमें से सिर्फ एक अखबार हिंदुस्तान ने दो पंक्तियां छापा, और उसमें भी मोदी का नाम हटा दिया)

आरा: 12 अप्रैल 2014
अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन-ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव का. मीना तिवारी और सचिव का. कविता कृष्णन ने नरेंद्र मोदी द्वारा अपनी पत्नी को 45 साल तक सम्मान और पहचान से वंचित रखने तथा बलात्कारियों के पक्ष में दिए गए मुलायम सिंह के बयान तथा स्त्री-पुरुष संबंधों पर अबू आजमी के बयान की सख्त आलोचना की है। 
ऐपवा नेताओं ने कहा है कि यूनिफार्म सिविल कोड की बात करने वाले मोदी ने खुद अपने जीवन में सिविल कोड का पालन नहीं किया है। 45 वर्षों तक जिसने अपनी पत्नी का सम्मान नहीं किया, वह देश की महिलाओं का सम्मान कैसे कर सकता है? मोदी के जरिए ऐसी पार्टी सत्ता में आना चाह रही है, जिसका महिलाओं के प्रति निर्मम अत्याचार और नृशंसता का इतिहास है। बजरंग दल और श्रीराम सेना द्वारा प्रेमी युगलों, खासकर लड़कियों पर हमले हों या गुजरात जनसंहार, मुजफ्फरनगर दंगा, बथानी टोला जनसंहार में महिलाओं के साथ बलात्कार करने, अंगों को हथियार से काटने या आग में झोंक देने की घटनाएं- ये भाजपा द्वारा महिलाओं के साथ नृशंस व्यवहार के हृदयविदारक उदाहरण हैं। मोदी पर एक स्त्री के पीछे पूरी प्रशासनिक मशीनरी और खुफिया पुलिस को लगाकर उसकी जासूसी कराने का भी गंभीर आरोप है। यह कानूनन गंभीर अपराध है। 
मुलायम सिंह यादव द्वारा बलात्कार के दोषियों की तरफदारी में दिए गए बयान तथा अबू आजमी द्वारा पति के अलावा किसी गैरपुरुष से संबंध बनाने वाली स्त्री को फांसी की सजा दिए जाने वाले बयान की भी ऐपवा नेताओं ने निंदा की है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह मुजफ्फरनगर दंगा में भाजपा और सपा का मुस्लिम विरोधी रवैये उजागर हुआ, उसी तरह स्त्रियों की आजादी, सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर भी दोनों की एकता दिख रही है। दोनों खापवादी मानसिकता से ग्रस्त हैं। खाप पंचायतें सहमति के आधार पर बनने वाले संबंधों में प्रेमियों की हत्याएं करती रही हैं, इन्हीं खाप पंचायतों को उकसाकर भाजपा के अमित शाह ने मुजफ्फरनगर में अल्पसंख्यकों के कत्लेआम करवाए और सपा के सांसद अबू आजमी इन्हीं खाप पंचायतों के लहजे में सहमति से बनने वाले संबंधों में लड़कियों को फांसी पर चढ़ाने की वकालत कर रहे हैं। चुनाव के इस दौर में ऐसी ताकतों को राजनैतिक शिकस्त देने के लिए महिलाओं को संगठित होना चाहिए। 

Friday, April 11, 2014

भोजपुर की इंकलाबी जनता मेरी ताकत है: राजू यादव

शासकवर्ग की राजनीतिक लहर के विपरीत जनता की लहर चलती है आरा में: राजू यादव
माले की जीत धन की ताकत पर जन की ताकत की जीत होगी: राजू यादव

आरा: 11 अप्रैल 2014 
दैनिक आज १२ अप्रैल 
प्रभात खबर 
आरा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के माले प्रत्याशी राजू यादव ने आज सहार व तरारी प्रखंडों केे सहार बाजार, मोआप, सिकरहटा, जनकपुरिया, अंधारी, चैंरी, बहुआरा, अमरूंहा, चक, धनछुंहा, पतलपुरा, खडांव, पेरहाप, एकवारी आदि में प्रचार अभियान चलाया। हर जगह ग्रामीणों और नौजवानों में भारी उत्साह दिख रहा है। राजू यादव ने लोगों से कहा कि भोजपुर में सामंती-सांप्रदायिक शक्तियों के आतंक और उत्पीड़न के खिलाफ गरीब-मेहनतकशों की जिस राजनीतिक दावेदारी के लिए भाकपा-माले ने पिछले चालीस वर्षों में जुझारू संघर्ष चलाया है, जिस सपने के लिए हमारे साथियों ने शहादत दी है, उन सपनों के साथ गद्दारी करने या उन सपनों को कुचलने की कोशिश करने वालों को जनता कभी भी माफ नहीं करेगी। 
दैनिक हिंदुस्तान 
राजू यादव ने कहा कि सूचना माध्यमों पर पूंजीवादी, सामंती-सांप्रदायिक शक्तियों का कब्जा है, उन्हें भी गरीबों और मेहनतकशों के खिलाफ खड़ा कर दिया गया है। इसलिए टीवी और अखबारों में आ रहे करोड़ों रुपये के अंधाधुंध विज्ञापनों के बहकावे में लोग न आएं, बल्कि धन के इस निर्लज्ज प्रदर्शन का करारा जवाब दें। आरा से माले की जीत धन की ताकत के खिलाफ जन की ताकत की जीत होगी। 
प्रचार अभियान के दौरान राजू ने कहा कि यह प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं हो रहा है, बल्कि सांसदों का चुनाव है। नीतियां तय करने में सांसदों की ही भूमिका होती है। संसद और विधानसभाओं में अगर जनपक्षीय लोग पहुंचते हैं, तो वे पूंजीपतियों और सामंती-सांप्रदायिक शक्तियों की चाकरी करने के बजाए वहां जनता की आवाज उठाते हैं। का. रामनरेश राम, का. रामेश्वर प्रसाद और का. महेंद्र सिंह जैसे माले के जनप्रतिनिधियों ने इसे साबित किया है कि संसद और विधानसभाओं के भीतर भी जनता की जोरदार लड़ाई लड़ी जा सकती है। 
राष्ट्रीय सहारा 
का. राजू यादव ने कहा कि भोजपुर की संघर्षशील और इंकलाबी जनता ही उनकी ताकत है। भोजपुर की खासियत यह है कि शासकवर्ग जो लहर पैदा करता है, हमेशा उसके खिलाफ यहां जनता की अपनी लहर चलती है। आरा से माले को जिताकर भोजपुर की जनता पूंजीवादपरस्त, सांप्रदायिक-सामंती-अवसरवादी राजनीति के विरोध में एक मजबूत जनराजनीतिक विकल्प और पूरे देश की राजनीति को एक सही रास्ता देगी, यह तय है। 

जबले ठगल तबले ठगल अबकी ना ठगाइब, अबकी माले जिताइब- हिरावल

हिरावल माले प्रत्याशी के प्रचार में उतरी
हिरावल के कलाकारों द्वारा निर्मित फिल्म ‘विकास का इलाज’ का भी माले के प्रचार में हो रहा है इस्तेमाल 

आरा: 10 अप्रैल 2014 
आरा से माले प्रत्याशी राजू यादव के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए संस्कृतिकर्मी भी उतर पड़े है। बिहार की चर्चित गीत-नाट्य संस्था ‘हिरावल’ के कलाकार संतोष झा, समता राय और अभिनव आरा संसदीय क्षेत्र के तमाम प्रमुख बाजार और प्रखंड मुख्यालयों पर देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर जनमानस को झकझोरने और संसद के भीतर माले जैसी जनपक्षीय जनराजनीतिक ताकत को भेजने की अपील करने वाले गीत पेश कर रहे हैं। 
राष्ट्रीय सहारा ११ अप्रैल 
इन गीतों में सांप्रदायिक उन्माद, कारपोरेटपरस्त राजनीति और राजनीतिक अवसरवाद व कुनबापरस्ती पर जोरदार प्रहार किया गया है। कलाकार तमाम सत्ताधारी पार्टियों के जनविरोधी चरित्र का पर्दाफाश कर रहे हैं। इन गीतों में एक ओर खेती, उद्योग के चैपट होने और जनता की हालत पस्त होने की सच्चाई का जिक्र किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी नेताओं के मस्त होने की विडंबना के माध्यम से जनता को उद्वेलित किया जा रहा है। सांसदों का क्षेत्र की जनता के बीच न जाने और विकास के झूठे दावे करने की प्रवृत्ति की भी आलोचना की गई है। 
लोकधुनों के अतिरिक्त कई आधुनिक धुनों का भी कलाकारों ने इस्तेमाल किया है। जबले ठगल तबले ठगल अबकी ना ठगाइब, अबकी माले जिताइब; सबनी से आस टूटल माले बस सहारा बा जैसे गीतों के जरिए कलाकार राजू यादव के लिए वोट देने की अपील कर रहे हैं। हिरावल के कलाकार कायमनगर, चांदी, संदेश, अजीमाबाद, सहार, पवना, गड़हनी, चरपोखरी, पीरो, खुटंहा मुफ्ती, हसन बाजार, अगिआंव बाजार में अपना कार्यक्रम पेश किया। कायमनगर में गायक राजू रंजन और गड़हनी में जनकवि कृष्ण कुमार निर्मोही भी उनके साथ थे। अभी ये आरा निर्वाचन क्षेत्र के अन्य इलाकों में भी कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे. हिरावल की ओर से प्रचार गीतों का एक ऑडियो सीडी भी निकाला गया है, जो माले के प्रचार अभियान में बज रहा है. 
हिरावल की ओर से ‘विकास का इलाज उर्फ माले है विकल्प’ नामक एक वीडियो फिल्म का निर्माण किया गया है, जिसमें बिहार के विकास के सवाल को केंद्र में रखा गया है, जिसमें तमाम सत्ताधारी पार्टियों के प्रमुख को डाॅक्टर के बतौर दिखाया गया है, जो दावे तो बड़े-बड़े कर रहे हैं, पर बिहार के हाथों में जो ‘विकास’ नामक बच्चा है, वह अविकसित ही रह जा रहा है। फिल्म में आखिर में एक सर्जन है, जिसके दो सहयोगी हैं- एक सांप्रदायिक ताकतें और दूसरा कारपोरेट। 
वह इन्हीं दोनों सहयोगियों के कंधे पर सवार होकर बिहार की जनता को विकास का सपना दिखा रहा है। लेकिन जनता उसके बड़बोले दावों में नहीं आती, वह छात्र-नौजवान, अल्पसंख्यक, महिलाएं, मजदूर, किसान, दलित, आदिवासी जनता उस पर सवालों की बौछार कर देती है। अंत में जनता इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि माले के लाल परचम के तले वह संघर्षों के बल पर  ‘विकास’ का इलाज करेगी, अपनी समस्याओं का समाधान करेगी। इस फिल्म में राजन, रामकुमार, अभिनव, युसूफ, संतोष झा, समता राय, सुमन कुमार, कुंदन, दिव्या गौतम, सुधीर सुमन समेत कई कलाकारों ने अभिनय किया है। 
दैनिक हिंदुस्तान 
यह एक ऐसी फिल्म है, जो चुनाव अभियान के बाद भी प्रासंगिक रहेगी, क्योंकि यह विकास के राजनीतिक दावों पर बहस छेड़ती है। इस फिल्म को माले के जनाधारों में काफी पसंद किया जा रहा है। 
प्रभात खबर 
साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी और प्रबुद्ध नागरिक भी माले प्रत्याशी राजू यादव के पक्ष में गोलबंद हो रहे हैं। प्रचार के अंतिम दौर में उनकी ओर से भी अपील का एक पर्चा जारी होगा।

आरा शहर में माले प्रत्याशी राजू यादव का सघन जनसंपर्क अभियान

सैकड़ों नौजवान प्रचार अभियान में शामिल हुए, नागरिकों में उत्साह 
सांप्रदायिक कारपोरेटपरस्त राजनीति को बदल देंगे छात्र-नौजवान: राजू यादव
आरा: 9 अप्रैल 2014
भाकपा-माले प्रत्याशी राजू यादव ने आज आरा शहर के अनाइठ, गोढ़ना रोड, बहिरो, श्रीटोला, जवाहरटोला, पूर्वी नवादा, करमनटोला, न्यू करमनटोला, शीतलटोला, न्यू शीतलटोला, शिवगंज, मोती टोला, धरहरा, चीकटोली, वलीगंज, दूधकटोरा, अबरपुल, भलुंहीपुर, मीराचक, बेगमपुर, तरी मुहल्ला और एम.पी.बाग में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान आइसा महासचिव अभ्युदय, माले जिला कमेटी सदस्य क्यामुद्दीन, आइसा नेता सुधीर, तारिक, वार्ड पार्षद गोपाल प्रसाद, लल्लू कुमार, राजेंद्र यादव, दीनानाथ सिंह, अमित कुमार बंटी, मो. शहाबुद्दीन, सुरेश पासवान, पूर्व वार्ड पार्षद सुरेंद्र साह, अवधेश जी, शेखर, मो. सैरूद्दीन, मो. शैफूल, राजू प्रसाद, सत्यदेव, अजिताभ, पवन समेत हाथों में लाल झंडा लिए सैकड़ों छात्र-नौजवान शामिल थे। 
dainik aaj 10 apr
राजू यादव ने कहा है कि हमारे साथ प्रचार में जितने छात्र-नौजवान हैं, वे धनबल के आधार पर नहीं जुटाए गए हैं, बल्कि ये हमारे आंदोलनों के साथी हैं। ये समझ रहे हैं कि शासकवर्गीय पार्टियां नौजवानों के साथ सिर्फ छल कर रही हैं। समान शिक्षा प्रणाली और सम्मानजनक रोजगार की जो मांग है, उसकी भाजपा, कांग्रेस, जद-यू, राजद सबने अनदेखी की है, जबकि भाकपा-माले इस पर लगातार संघर्ष करती रही है। नौजवान जिनके कंधे पर देश का भविष्य है, उन पर भरोसा करने के बजाए सत्ताधारी पार्टियां भ्रष्ट अवसरवादी नेताओं, अपने बेटे-बेटियों, रिटायर्ड नौकरशाहों, थैलीशाहों और अपराधियों को टिकट दे रही हैं। ऐसे लोग सांसद बनेंगे तो नौजवानों की जिंदगी से खिलवाड़ ही करेंगे। 
rashtriy sahara 11 apr 
यह दैनिक हिंदुस्तान की खबर 
राजू यादव ने कहा है कि भाकपा-माले ने छात्र-नौजवान-महिला और मजदूर-किसान आंदोलनों का ईमानदारी से नेतृत्व करने वाले कई नौजवान नेताओं को अपना प्रत्याशी बनाया है। ये सारे नौजवान आम जनता के बीच से आए हैं, किसी पूंजीवादी-सामंती-सांप्रदायिक ताकत से इनका सरोकार नहीं है। यह राजनीति का वह चेहरा है, जो इस देश की सांप्रदायिक-कारपोरेटपरस्त राजनीति को बदल सकता है। 
राजू यादव ने कहा कि गरीब-मेहनतकशों के तमाम मुहल्लों में जिस उत्साह से हमारा स्वागत हो रहा है, वह बता रहा है कि लोग दलबदलू, अवसरवादी और संप्रदायवादी प्रत्याशियों से उब चुके हैं, वे परिवर्तन चाहते हैं। लोग भरोसेमंद सांसद चाहते हैं, जिसका  स्थानीय जनता की जिंदगी और उसके मुद्दों से प्रत्यक्ष संबंध हो तथा जो आरा संसदीय क्षेत्र की जनता की समस्याओं के लिए जिम्मेवार नीतियों को बदलने के लिए संघर्ष करे। बतौर माले उम्मीदवार वे जनता के इसी आकांक्षा को पूरा करने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।