Saturday, April 12, 2014

राजू यादव के समर्थन में आरा के प्रबुद्ध नागरिकों की अपील


माले की तमाम कमिटियां और इससे जुड़े सारे जनसंगठन राजू यादव के प्रचार में लगे हैं

माले का चौतरफा चुनाव प्रचार जारी है: का. कुणाल 

आरा: 12 अप्रैल 2014
आरा में अपने प्रत्याशी के चुनाव प्रचार के लिए कैंप किए हुए भाकपा-माले के राज्य सचिव का. कुणाल ने कहा है कि पूरे लोकसभा में पार्टी का जमीनी स्तर पर जोरदार प्रचार अभियान चल रहा है
दैनिक आज १३ अप्रैल 
प्रभात खबर 
केंद्रीय कमेटी का. कृष्णदेव यादव, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, राज्य कमेटी सदस्य का. सुदामा प्रसाद, जिला सचिव का. जवाहरलाल सिंह समेत तमाम जिला कमेटी सदस्य, इनौस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का. असलम, आइसा के राज्य सचिव का. अजित कुशवाहा, आइसा जिला अध्यक्ष का. सबीर, ऐपवा की शोभा मंडल, ऐक्टू के यदुनंदन चैधरी, बिहार राज्य कर्मचारी महासंघ-गोप गुट के मदन प्रसाद और उमा यादव, रिक्शा टमटम, टेंपू यूनियन के नेता का. गोपाल प्रसाद, फुटपाथी दूकानदार संघ सह निर्माण मजदूर यूनियन के बालमुकुंद यूनियन, आॅल बिहार प्रोग्रेसिव एडवोकेट एसोसिएशन के अमित कुमार बंटी, माले नगर सचिव का. दिलराज प्रीतम, वार्ड पार्षद विद्यावती देवी, सुधा देवी, लल्लू कुमार, नगर कमेटी सदस्य सत्यदेव, दीनानाथ सिंह, राजनाथ पासवान, सुरेश पासवान, खेमस के कामता प्रसाद सिंह, अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष चंद्रदीप सिंह, पूर्व विधायक अरुण सिंह समेत तमाम प्रखंडों और ब्रांचों के सचिव इस चुनाव अभियान में लगे हैं।
दैनिक हिन्दुस्तान 
इंकलाब नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि राय अगिआंव में तथा राज्य स्थायी समिति के सदस्य का. संतोष सहर शाहपुर  में, का. क्यामुद्दीन आरा मुफस्सिल में तथा का. महेश और राजू रंजन बड़हरा में, संदेश में परशुराम सिंह, सहार में मदन जी, तरारी में विंदेश्वरी जी, चरपोखरी में रमेश और रघुवर पासवान, पीरो में विजय जी आदि खास तौर पर चुनाव के अभियान की कमान संभाले हुए हैं। आइसा ने करीब साढ़े तीन सौ छात्र-नौजवानों को चुनाव प्रचार के लिए संगठित किया है, जो पिछले दो सप्ताह से पूरावक्ती कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं।
कई दिनों के बाद जागरण में एक छोटी सी खबर 
सांस्कृतिक संगठन हिरावल और युवानीति के कलाकार भी प्रचार में जुटे हुए हैं। हर रोज नए-नए कार्यकर्ता और प्रचारक पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं। पार्टी की सभाओं और बैठकों मे उत्साह के साथ उमड़ती जनता को देखकर इस बार लगता है कि माले 1989 के इतिहास को दुहराएगा और राजू यादव को यहां से जीत हासिल होगी। 
कल से पार्टी के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य दो दिवसीय दौरा शुरू हो रहा है। जिसमें वे आठ सभाओं को संबोधित करेंगे। 

जिसने अपनी पत्नी का सम्मान नहीं किया, वह देश की महिलाओं का सम्मान कैसे करेगा?: ऐपवा



भाजपा-सपा दोनों खापवादी मानसिकता से ग्रस्त हैं: ऐपवा
मुलायम सिंह यादव और अबू आजमी के बयानों की भी निंदा
(आरा में यह प्रेस रिलीज दिया गया था, जिसमें से सिर्फ एक अखबार हिंदुस्तान ने दो पंक्तियां छापा, और उसमें भी मोदी का नाम हटा दिया)

आरा: 12 अप्रैल 2014
अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन-ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव का. मीना तिवारी और सचिव का. कविता कृष्णन ने नरेंद्र मोदी द्वारा अपनी पत्नी को 45 साल तक सम्मान और पहचान से वंचित रखने तथा बलात्कारियों के पक्ष में दिए गए मुलायम सिंह के बयान तथा स्त्री-पुरुष संबंधों पर अबू आजमी के बयान की सख्त आलोचना की है। 
ऐपवा नेताओं ने कहा है कि यूनिफार्म सिविल कोड की बात करने वाले मोदी ने खुद अपने जीवन में सिविल कोड का पालन नहीं किया है। 45 वर्षों तक जिसने अपनी पत्नी का सम्मान नहीं किया, वह देश की महिलाओं का सम्मान कैसे कर सकता है? मोदी के जरिए ऐसी पार्टी सत्ता में आना चाह रही है, जिसका महिलाओं के प्रति निर्मम अत्याचार और नृशंसता का इतिहास है। बजरंग दल और श्रीराम सेना द्वारा प्रेमी युगलों, खासकर लड़कियों पर हमले हों या गुजरात जनसंहार, मुजफ्फरनगर दंगा, बथानी टोला जनसंहार में महिलाओं के साथ बलात्कार करने, अंगों को हथियार से काटने या आग में झोंक देने की घटनाएं- ये भाजपा द्वारा महिलाओं के साथ नृशंस व्यवहार के हृदयविदारक उदाहरण हैं। मोदी पर एक स्त्री के पीछे पूरी प्रशासनिक मशीनरी और खुफिया पुलिस को लगाकर उसकी जासूसी कराने का भी गंभीर आरोप है। यह कानूनन गंभीर अपराध है। 
मुलायम सिंह यादव द्वारा बलात्कार के दोषियों की तरफदारी में दिए गए बयान तथा अबू आजमी द्वारा पति के अलावा किसी गैरपुरुष से संबंध बनाने वाली स्त्री को फांसी की सजा दिए जाने वाले बयान की भी ऐपवा नेताओं ने निंदा की है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह मुजफ्फरनगर दंगा में भाजपा और सपा का मुस्लिम विरोधी रवैये उजागर हुआ, उसी तरह स्त्रियों की आजादी, सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर भी दोनों की एकता दिख रही है। दोनों खापवादी मानसिकता से ग्रस्त हैं। खाप पंचायतें सहमति के आधार पर बनने वाले संबंधों में प्रेमियों की हत्याएं करती रही हैं, इन्हीं खाप पंचायतों को उकसाकर भाजपा के अमित शाह ने मुजफ्फरनगर में अल्पसंख्यकों के कत्लेआम करवाए और सपा के सांसद अबू आजमी इन्हीं खाप पंचायतों के लहजे में सहमति से बनने वाले संबंधों में लड़कियों को फांसी पर चढ़ाने की वकालत कर रहे हैं। चुनाव के इस दौर में ऐसी ताकतों को राजनैतिक शिकस्त देने के लिए महिलाओं को संगठित होना चाहिए। 

Friday, April 11, 2014

भोजपुर की इंकलाबी जनता मेरी ताकत है: राजू यादव

शासकवर्ग की राजनीतिक लहर के विपरीत जनता की लहर चलती है आरा में: राजू यादव
माले की जीत धन की ताकत पर जन की ताकत की जीत होगी: राजू यादव

आरा: 11 अप्रैल 2014 
दैनिक आज १२ अप्रैल 
प्रभात खबर 
आरा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के माले प्रत्याशी राजू यादव ने आज सहार व तरारी प्रखंडों केे सहार बाजार, मोआप, सिकरहटा, जनकपुरिया, अंधारी, चैंरी, बहुआरा, अमरूंहा, चक, धनछुंहा, पतलपुरा, खडांव, पेरहाप, एकवारी आदि में प्रचार अभियान चलाया। हर जगह ग्रामीणों और नौजवानों में भारी उत्साह दिख रहा है। राजू यादव ने लोगों से कहा कि भोजपुर में सामंती-सांप्रदायिक शक्तियों के आतंक और उत्पीड़न के खिलाफ गरीब-मेहनतकशों की जिस राजनीतिक दावेदारी के लिए भाकपा-माले ने पिछले चालीस वर्षों में जुझारू संघर्ष चलाया है, जिस सपने के लिए हमारे साथियों ने शहादत दी है, उन सपनों के साथ गद्दारी करने या उन सपनों को कुचलने की कोशिश करने वालों को जनता कभी भी माफ नहीं करेगी। 
दैनिक हिंदुस्तान 
राजू यादव ने कहा कि सूचना माध्यमों पर पूंजीवादी, सामंती-सांप्रदायिक शक्तियों का कब्जा है, उन्हें भी गरीबों और मेहनतकशों के खिलाफ खड़ा कर दिया गया है। इसलिए टीवी और अखबारों में आ रहे करोड़ों रुपये के अंधाधुंध विज्ञापनों के बहकावे में लोग न आएं, बल्कि धन के इस निर्लज्ज प्रदर्शन का करारा जवाब दें। आरा से माले की जीत धन की ताकत के खिलाफ जन की ताकत की जीत होगी। 
प्रचार अभियान के दौरान राजू ने कहा कि यह प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं हो रहा है, बल्कि सांसदों का चुनाव है। नीतियां तय करने में सांसदों की ही भूमिका होती है। संसद और विधानसभाओं में अगर जनपक्षीय लोग पहुंचते हैं, तो वे पूंजीपतियों और सामंती-सांप्रदायिक शक्तियों की चाकरी करने के बजाए वहां जनता की आवाज उठाते हैं। का. रामनरेश राम, का. रामेश्वर प्रसाद और का. महेंद्र सिंह जैसे माले के जनप्रतिनिधियों ने इसे साबित किया है कि संसद और विधानसभाओं के भीतर भी जनता की जोरदार लड़ाई लड़ी जा सकती है। 
राष्ट्रीय सहारा 
का. राजू यादव ने कहा कि भोजपुर की संघर्षशील और इंकलाबी जनता ही उनकी ताकत है। भोजपुर की खासियत यह है कि शासकवर्ग जो लहर पैदा करता है, हमेशा उसके खिलाफ यहां जनता की अपनी लहर चलती है। आरा से माले को जिताकर भोजपुर की जनता पूंजीवादपरस्त, सांप्रदायिक-सामंती-अवसरवादी राजनीति के विरोध में एक मजबूत जनराजनीतिक विकल्प और पूरे देश की राजनीति को एक सही रास्ता देगी, यह तय है। 

जबले ठगल तबले ठगल अबकी ना ठगाइब, अबकी माले जिताइब- हिरावल

हिरावल माले प्रत्याशी के प्रचार में उतरी
हिरावल के कलाकारों द्वारा निर्मित फिल्म ‘विकास का इलाज’ का भी माले के प्रचार में हो रहा है इस्तेमाल 

आरा: 10 अप्रैल 2014 
आरा से माले प्रत्याशी राजू यादव के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए संस्कृतिकर्मी भी उतर पड़े है। बिहार की चर्चित गीत-नाट्य संस्था ‘हिरावल’ के कलाकार संतोष झा, समता राय और अभिनव आरा संसदीय क्षेत्र के तमाम प्रमुख बाजार और प्रखंड मुख्यालयों पर देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर जनमानस को झकझोरने और संसद के भीतर माले जैसी जनपक्षीय जनराजनीतिक ताकत को भेजने की अपील करने वाले गीत पेश कर रहे हैं। 
राष्ट्रीय सहारा ११ अप्रैल 
इन गीतों में सांप्रदायिक उन्माद, कारपोरेटपरस्त राजनीति और राजनीतिक अवसरवाद व कुनबापरस्ती पर जोरदार प्रहार किया गया है। कलाकार तमाम सत्ताधारी पार्टियों के जनविरोधी चरित्र का पर्दाफाश कर रहे हैं। इन गीतों में एक ओर खेती, उद्योग के चैपट होने और जनता की हालत पस्त होने की सच्चाई का जिक्र किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी नेताओं के मस्त होने की विडंबना के माध्यम से जनता को उद्वेलित किया जा रहा है। सांसदों का क्षेत्र की जनता के बीच न जाने और विकास के झूठे दावे करने की प्रवृत्ति की भी आलोचना की गई है। 
लोकधुनों के अतिरिक्त कई आधुनिक धुनों का भी कलाकारों ने इस्तेमाल किया है। जबले ठगल तबले ठगल अबकी ना ठगाइब, अबकी माले जिताइब; सबनी से आस टूटल माले बस सहारा बा जैसे गीतों के जरिए कलाकार राजू यादव के लिए वोट देने की अपील कर रहे हैं। हिरावल के कलाकार कायमनगर, चांदी, संदेश, अजीमाबाद, सहार, पवना, गड़हनी, चरपोखरी, पीरो, खुटंहा मुफ्ती, हसन बाजार, अगिआंव बाजार में अपना कार्यक्रम पेश किया। कायमनगर में गायक राजू रंजन और गड़हनी में जनकवि कृष्ण कुमार निर्मोही भी उनके साथ थे। अभी ये आरा निर्वाचन क्षेत्र के अन्य इलाकों में भी कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे. हिरावल की ओर से प्रचार गीतों का एक ऑडियो सीडी भी निकाला गया है, जो माले के प्रचार अभियान में बज रहा है. 
हिरावल की ओर से ‘विकास का इलाज उर्फ माले है विकल्प’ नामक एक वीडियो फिल्म का निर्माण किया गया है, जिसमें बिहार के विकास के सवाल को केंद्र में रखा गया है, जिसमें तमाम सत्ताधारी पार्टियों के प्रमुख को डाॅक्टर के बतौर दिखाया गया है, जो दावे तो बड़े-बड़े कर रहे हैं, पर बिहार के हाथों में जो ‘विकास’ नामक बच्चा है, वह अविकसित ही रह जा रहा है। फिल्म में आखिर में एक सर्जन है, जिसके दो सहयोगी हैं- एक सांप्रदायिक ताकतें और दूसरा कारपोरेट। 
वह इन्हीं दोनों सहयोगियों के कंधे पर सवार होकर बिहार की जनता को विकास का सपना दिखा रहा है। लेकिन जनता उसके बड़बोले दावों में नहीं आती, वह छात्र-नौजवान, अल्पसंख्यक, महिलाएं, मजदूर, किसान, दलित, आदिवासी जनता उस पर सवालों की बौछार कर देती है। अंत में जनता इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि माले के लाल परचम के तले वह संघर्षों के बल पर  ‘विकास’ का इलाज करेगी, अपनी समस्याओं का समाधान करेगी। इस फिल्म में राजन, रामकुमार, अभिनव, युसूफ, संतोष झा, समता राय, सुमन कुमार, कुंदन, दिव्या गौतम, सुधीर सुमन समेत कई कलाकारों ने अभिनय किया है। 
दैनिक हिंदुस्तान 
यह एक ऐसी फिल्म है, जो चुनाव अभियान के बाद भी प्रासंगिक रहेगी, क्योंकि यह विकास के राजनीतिक दावों पर बहस छेड़ती है। इस फिल्म को माले के जनाधारों में काफी पसंद किया जा रहा है। 
प्रभात खबर 
साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी और प्रबुद्ध नागरिक भी माले प्रत्याशी राजू यादव के पक्ष में गोलबंद हो रहे हैं। प्रचार के अंतिम दौर में उनकी ओर से भी अपील का एक पर्चा जारी होगा।

आरा शहर में माले प्रत्याशी राजू यादव का सघन जनसंपर्क अभियान

सैकड़ों नौजवान प्रचार अभियान में शामिल हुए, नागरिकों में उत्साह 
सांप्रदायिक कारपोरेटपरस्त राजनीति को बदल देंगे छात्र-नौजवान: राजू यादव
आरा: 9 अप्रैल 2014
भाकपा-माले प्रत्याशी राजू यादव ने आज आरा शहर के अनाइठ, गोढ़ना रोड, बहिरो, श्रीटोला, जवाहरटोला, पूर्वी नवादा, करमनटोला, न्यू करमनटोला, शीतलटोला, न्यू शीतलटोला, शिवगंज, मोती टोला, धरहरा, चीकटोली, वलीगंज, दूधकटोरा, अबरपुल, भलुंहीपुर, मीराचक, बेगमपुर, तरी मुहल्ला और एम.पी.बाग में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान आइसा महासचिव अभ्युदय, माले जिला कमेटी सदस्य क्यामुद्दीन, आइसा नेता सुधीर, तारिक, वार्ड पार्षद गोपाल प्रसाद, लल्लू कुमार, राजेंद्र यादव, दीनानाथ सिंह, अमित कुमार बंटी, मो. शहाबुद्दीन, सुरेश पासवान, पूर्व वार्ड पार्षद सुरेंद्र साह, अवधेश जी, शेखर, मो. सैरूद्दीन, मो. शैफूल, राजू प्रसाद, सत्यदेव, अजिताभ, पवन समेत हाथों में लाल झंडा लिए सैकड़ों छात्र-नौजवान शामिल थे। 
dainik aaj 10 apr
राजू यादव ने कहा है कि हमारे साथ प्रचार में जितने छात्र-नौजवान हैं, वे धनबल के आधार पर नहीं जुटाए गए हैं, बल्कि ये हमारे आंदोलनों के साथी हैं। ये समझ रहे हैं कि शासकवर्गीय पार्टियां नौजवानों के साथ सिर्फ छल कर रही हैं। समान शिक्षा प्रणाली और सम्मानजनक रोजगार की जो मांग है, उसकी भाजपा, कांग्रेस, जद-यू, राजद सबने अनदेखी की है, जबकि भाकपा-माले इस पर लगातार संघर्ष करती रही है। नौजवान जिनके कंधे पर देश का भविष्य है, उन पर भरोसा करने के बजाए सत्ताधारी पार्टियां भ्रष्ट अवसरवादी नेताओं, अपने बेटे-बेटियों, रिटायर्ड नौकरशाहों, थैलीशाहों और अपराधियों को टिकट दे रही हैं। ऐसे लोग सांसद बनेंगे तो नौजवानों की जिंदगी से खिलवाड़ ही करेंगे। 
rashtriy sahara 11 apr 
यह दैनिक हिंदुस्तान की खबर 
राजू यादव ने कहा है कि भाकपा-माले ने छात्र-नौजवान-महिला और मजदूर-किसान आंदोलनों का ईमानदारी से नेतृत्व करने वाले कई नौजवान नेताओं को अपना प्रत्याशी बनाया है। ये सारे नौजवान आम जनता के बीच से आए हैं, किसी पूंजीवादी-सामंती-सांप्रदायिक ताकत से इनका सरोकार नहीं है। यह राजनीति का वह चेहरा है, जो इस देश की सांप्रदायिक-कारपोरेटपरस्त राजनीति को बदल सकता है। 
राजू यादव ने कहा कि गरीब-मेहनतकशों के तमाम मुहल्लों में जिस उत्साह से हमारा स्वागत हो रहा है, वह बता रहा है कि लोग दलबदलू, अवसरवादी और संप्रदायवादी प्रत्याशियों से उब चुके हैं, वे परिवर्तन चाहते हैं। लोग भरोसेमंद सांसद चाहते हैं, जिसका  स्थानीय जनता की जिंदगी और उसके मुद्दों से प्रत्यक्ष संबंध हो तथा जो आरा संसदीय क्षेत्र की जनता की समस्याओं के लिए जिम्मेवार नीतियों को बदलने के लिए संघर्ष करे। बतौर माले उम्मीदवार वे जनता के इसी आकांक्षा को पूरा करने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।

Wednesday, April 9, 2014

साहित्यकार-संस्कृतिकर्मियों और प्रबुद्ध नागरिकों की मतदाताओं से अपील


(यह अपील का प्रारूप है जिसे साहित्यकार-संस्कृतिकर्मियों और प्रबुद्ध नागरिकों को भेजा गया है. जितने लोग अपीलकर्ता के रूप में अपने नाम की सहमति देंगे उनके नाम से यह पर्चा छपवाया जायेगा.  सहमति यहाँ दी जा सकती है. )


बदलो नीति बदलो राज, संसद में जनता की आवाज

सांप्रदायिक उन्माद, अन्याय, अवसरवाद और लूट की राजनीति को शिकस्त दें
जनता के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए माले को वोट दें

महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी व प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर रोक लगाएं
जनता के लोकतांत्रिक आंदोलनों को मजबूत बनाएं, आरा से राजू यादव को जिताएं

मतदाता बंधुओ,
इस लोकसभा चुनाव में देश के पूंजीपति इस बार सीधे अपने पसंद का प्रधानमंत्री बनाने के अरबों-खरबों रुपये खर्च कर रहे हैं। उनको उम्मीद है कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे, तो उनको फायदा पहुंचाने वाली नीतियों को बर्बरता से लागू करेंगे। इसी कारण पूंजीवादी मीडिया गुजरात में जनता के विकास के झूठे माॅडल का दिन-रात शोर मचा रही है। सवाल यह है कि क्या हम 2002 के राज्य प्रायोजित गुजरात जनसंहार को भूल सकते हैं? क्या हम देश बेचने को देश प्रेम कहेंगे, क्या अल्पसंख्यकों, दलितों, गरीबों के कत्लेआम को राष्ट्रवाद कहेंगे, क्या आदिवासियों और किसानों की जमीन को हड़पकर अंबानी-अडानी जैसे पूंजीपतियों को दे देने को विकास कहेंगे, क्या हम पूंजीपतियों को लूट की छूट देने को जनता का विकास मान लेंगे?
अपील पर कवि केडी सिंह की काव्यात्मक प्रतिक्रिया 
बंधुओ, भाजपा केंद्र की यूपीए सरकार की ही आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ा रही है। इन नीतियों के कारण ही बेरोजगारी और महंगाई बढ़ी है, बड़े पैमाने के घोटाले और भ्रष्टाचार हुए हैं। भाजपा के मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक सांप्रदायिक उन्माद भड़काने के साथ-साथ भ्रष्टाचार और घोटालों में भी लिप्त पाए गए हैं। भाजपा की पूंजीवादपरस्त सामंती-सांप्रदायिक फासीवादी राजनीति का एकमात्र जवाब जनता की सच्ची राजनीति ही हो सकती है। उन पार्टियों से कोई उम्मीद करना बेकार है, जिनका  सांप्रदायिक-जातिवादी-क्षेत्रवादी धुव्रीकरण तथा काले धन और अवसरवादी गठबंधनों के जरिए संसद में पहुंचना ही एकमात्र मकसद रह गया है। भाजपा समेत तमाम शासकवर्गीय पार्टियों को लगता है कि पांच साल जनता के सवालों और संघर्षों से कटे रहकर भी चुनाव के वक्त अपने झूठे दावों के घनघोर मीडिया प्रचार, हैलिकाॅप्टर वाली रैलियों और धन के बल पर वे जनता के वोट को हड़प सकती हैं और जनता उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। 
आइए धन और लूट की इस राजनीति की मनमानियों के खिलाफ जन की राजनीति को विजयी बनाएं। भाकपा-माले ऐसी पार्टी है, जो हमेशा जनता के सहयोग से जनता के बुनियादी मुद्दों पर चुनाव लड़ती रही है। माले ने समाज के गरीब-कमजोर वर्ग को वोट का अधिकार दिलाने के लिए भी ऐतिहासिक संघर्ष किया है। ग्रामीण गरीबों और खेत मजदूरों के लिए रोजगार और मजदूरी का सवाल हो या सोन नहर के आधुनिकीकरण, नलकूप, डीजल अनुदान, धान क्रय केंद्र और फसल की उचित कीमत का सवाल या छात्र-नौजवानों की शिक्षा, बेराजगारी आदि के सवाल, माले ही इन सवालों पर लगातार आंदोलन करती रही है। सड़क, सफाई, स्वास्थ्य, आम अवाम की सुरक्षा आदि तमाम मुद्दों पर माले ने संघर्ष चलाया है। बाढ़-सूखा-अकाल जैसी आपदाओं के वक्त भी जनता की मदद में यह पार्टी खड़ी नजर आती है। हाल-फिलहाल में बिजली की दर वृद्धि के खिलाफ इसके राज्यव्यापी आंदोलन के कारण सरकार को प्रस्तावित वृद्धि वापस लेनी पड़ी। बिहार सरकार की शराब नीति ने जिस तरह की असामाजिकता, खासकर महिला विरोधी सामंती संस्कृति का मनोबल बढ़ाया है, उसके खिलाफ भी माले ने शराबबंदी का आंदोलन चलाया। शराबबंदी के सवाल पर और बच्चियों के बलात्कार के खिलाफ आंदोलन करने के कारण माले के रोहतास जिला सचिव भैयाराम यादव को शहादत तक देनी पड़ी। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आजादी के लिए लड़ने का इस पार्टी का बेमिसाल रिकार्ड रहा है।
माले ने जद-यू, लोजपा की तरह सांप्रदायिक उन्माद की ताकतों के साथ कभी भी समझौता नहीं किया, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द और सेकुलरिज्म के लिए जमीनी स्तर पर संघर्ष किया है। संप्रदाय और जाति के मुखौटे में रहने वाले बाहुबलियों और अपराधियों के खिलाफ यह पार्टी संघर्ष चलाती रही है, जबकि सत्ताधारी जद-यू हो या भाजपा, राजद, लोजपा सब उनको संरक्षण देते रहे हैं। ऐन चुनाव प्रचार के दौरान माले नेता बुधराम पासवान की रात के अंधेरे में जिस निर्मम तरीके से हत्या की गई, वह एक राजनैतिक साजिश ही लगती है। इस हत्या के बाद माले कार्यकर्ताओं ने जिस अनुशासन और संयम का परिचय दिया, उसकी तुलना आरा में ही नरसंहारों के लिए चर्चित एक आरोपी की हत्या के बाद मचाए गए तोड़फोड़ और आतंक से करें, तो अन्याय और अपराध की संरक्षक राजनीति और जनता की राजनीति का फर्क स्पष्ट हो जाता है। आज भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की बात सब कर रहे हैं, यहां तक कि बिहार सरकार भी, लेकिन शायद यह अलग से बताने की जरूरत नहीं है कि बिहार में भ्रष्टाचार कई गुना बढ़ चुका है, जनता इसे हर रोज झेल रही है। भ्रष्टाचार चाहे नीतियों की वजह से हो या भ्रष्टाचार प्रशासन और राजनीति में हो, माले का ही उससे स्वाभाविक टकराव रहा है। 
भाकपा-माले ने  आरा से युवा नेता राजू यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है। माले उम्मीदवार की छवि एक ईमानदार और समर्पित जनराजनैतिक कार्यकर्ता की है। वे न तो दलबदलू हैं और न ही अचानक राजनीति में आ टपके हैं। आपसे अपील है कि भाकपा-माले को हर स्तर से सहयोग करके आरा से इस देश में एक ताकतवर जनराजनीतिक विकल्प दीजिए। जनता के बुनियादी सवालों पर संघर्ष करने वाली पार्टी भाकपा-माले और उसके युवा उम्मीदवार राजू यादव को वोट देकर संसद में भेजिए, ताकि वे वहां पहुंचकर संसद के भीतर जनपक्षीय नीतियों के निर्माण के लिए संघर्ष करें। इतिहास के हर नाजुक मोड़ पर भोजपुर ने विकल्प दिया है, उस परंपरा को आगे बढ़ाइए। आइए इस देश और लोकतंत्र को बचाने तथा देश की राजनीति को जनपक्षीय दिशा देने के संघर्ष में हम सब भी अपनी निर्णायक भूमिका निभाएं।