Monday, April 7, 2014

कारपोरेट रथ और सांप्रदायिक उन्माद के रथ को रोकें छात्र-नौजवान: दीपंकर भट्टाचार्य

आॅल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन आइसा
भोजपुर


छात्रनेता चंद्रशेखर के शहादत दिवस पर संकल्प सभा
400 छात्र-युवा प्रचारक राजू यादव के पक्ष में प्रचार करेंगे, आज से प्रचार शुरू: अभ्युदय

आरा: 1 अप्रैल  2014
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के परिसर में जेनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष शहीद छात्रनेता चंद्रशेखर की याद में आयोजित ‘छात्र-युवा संकल्प सभा’ में भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि समाज से हमलोग जो लेते हैं, उसे समाज को लौटाने की भी हमारी जिम्मेवारी है।  शहादत से पूर्व चारु मजूमदार ने कहा था कि जनता का स्वार्थ ही पार्टी का स्वार्थ है। जनता के स्वार्थ के लिए माले के अनेक कामरेड जनविरोधी सामाजिक-राजनीति सत्ताओं के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहीद हुए। सीवान में चंद्रशेखर और श्यामनारायण यादव से लेकर हाल में चरपोखरी में बुधराम पासवान की शहादत इसका साक्ष्य है। उन्होंने राजनीति को जनता की सेवा में लगाने की बात कहते हुए छात्र-नौजवानों का आह्वान किया कि कारपोरेट लूट, सांप्रदायिक उन्माद और तानाशाही के जिस रथ को मोदी के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है, उसे सेकुलरिज्म, सामाजिक न्याय और महंगाई, बेरोजगारी आदि जनता के बुनियादी सवालों पर मौकापरस्ती और धोखे की राजनीति करने वालों के बल पर नहीं रोका जा सकता। इस जनविरोधी राजनीति को रोकने और राजनीति को जनता की सेवा में लगाने का बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेवारी छात्र-नौजवानों के कंधों पर है। राजू यादव छात्र राजनीति से जुड़े रहे है, अब जन राजनीति में अपनी भूमिका निभाने जा रहे हैं। उनसे हमारी उम्मीद है कि वे किसान-मजदूरों, छात्र-नौजवानों के लिए काम करेंगे, महिलाओं, गरीब-दलित- कमजोर वर्ग के लोगों की सुरक्षा और सम्मान के लिए काम करेंगे।
संकल्प सभा में आइसा के राष्ट्रीय महासचिव अभ्युदय, राज्य सह सचिव तारिक अनवर, राज्य उपाध्यक्ष सुधीर, जिलाध्यक्ष सबीर, राज्य कार्यकारिणी सदस्य रचना सिंह, अभय कुशवाहा, पप्पू, संदीप, मुकेश, संजय, राकेश, उपेंद्र, सुमन कुमारी, नीरज कुमार, रंजन कुमार, सुशील कुमार, गोलू समेत सैकड़ों छात्र शामिल थे। सभा का संचालन आइसा जिला सचिव शिवप्रकाश रंजन ने किया। ‘छात्र युवा संकल्प सभा’ में छात्र-नौजवानों ने सामंती-सांप्रदायिक उन्माद और कारपोरेट लूट के लिए जिम्मेवार राजनैतिक ताकतों के खिलाफ माले के युवा उम्मीदवार राजू यादव के प्रचारक के बतौर काम करने का संकल्प लिया। 
आइसा के राष्ट्रीय महासचिव अभ्युदय के अनुसार करीब 400 छात्र प्रचारक की भूमिका निभाने के लिए तैयार हुए हैं, जो आरा शहर और आरा मुफस्सिल के विभिन्न इलाकों में राजू यादव के पक्ष में प्रचार करेंगे। आइसा राज्य सचिव अजित कुशवाहा समेत कुछ नेता और कार्यकर्ता अगियांव और जगदीशपुर विधानसभा में भी प्रचार में लगे हुए हैं। आज से आरा विधानसभा के छह इलाकों में भी युवाओं का दल प्रचार में उतर चुका है। पिछले दिनों छात्रावासों और मुहल्लों में कई बैठकों के बाद प्रचारक के बतौर काम करने के लिए छात्र-नौजवानों की इतनी बड़ी गोलबंदी बनी है। जिस दौर में शासकवर्गीय पार्टियों ने राजनीति को बिल्कुल व्यक्तिगत स्वार्थपूर्ति का जरिया बना दिया है, जब मौकापरस्ती ही एकमात्र राजनीतिक सिद्धांत लगने लगा है, जब लग रहा है कि कुर्सी का लालच देकर किसी भी राजनेता को खरीदा जा सकता है, जब धन के बल पर प्रचारक बनाने और वोट खरीद लेने की राजनीति का प्रचलन बढ़ चुका है, तब इस तरह किसी नौजवान प्रत्याशी के प्रचार के लिए बिना किसी प्रलोभन के युवाओं का इस तरह सामने आना भविष्य की राजनीति के लिए एक सुखद संकेत है। आरा के छात्र-नौजवानों की यह भूमिका काफी उत्साहजनक है। आरा से राजू यादव की जीत से संसद के भीतर जनता के तमाम मुद्दों के साथ शिक्षा और रोजगार के सवाल पर भी मजबूत आवाज उठेगी, छात्र-नौजवानों को इसकी जबर्दस्त उम्मीद है। 

वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व सांसद रामअवधेश सिंह राजू यादव के समर्थन में प्रचार में उतरे

संसद में छात्र-नौजवानों, किसान-मजदूरों के पक्ष में नीतियां बनें इसके लिए राजू यादव को जिताने की अपील की का. दीपंकर ने 
वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व सांसद रामअवधेश सिंह राजू यादव के समर्थन में प्रचार में उतरे
शाहपुर और बड़हरा में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान का वादा किया राजू यादव ने 

बिहिया/ बेलवनिया/ सरैया बाजार/ जमालपुर: 31 मार्च 2014
‘जनसंवाद अभियान के दौरान भोजपुर के छात्र, नौजवान, किसान-मजदूर, व्यवसायी, और अमन व इंसाफ बुद्धिजीवियों नागरिकों ने जिन सवालों को चुनाव के लिए जरूरी सवाल बताया, भाकपा-माले उन्हीं सवालों पर यह लोकसभा चुनाव लड़ रही है। माले ने अपना घोषणा पत्र भी जनता के उन्हीं बुनियादी मुद्दों के आधार पर बनाया है। जनता जिन आर्थिक नीिितयों से तबाह है, उनको लागू करने के मामले में कांग्रेस और भाजपा में कोई मतभेद नहीं है। आज बहुत सारे लोगों के पास अपना घर नहीं है, लेकिन कांग्रेस-भाजपा की नीतियों के कारण अंबानी के पास दुनिया के सारे साधनों वाला बहुमंजिला इमारत बन गया है।’ भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने बिहिया, बेलवनिया, सरैया बाजार, जमालपुर में माले प्रत्याशी राजू यादव के पक्ष में आयोजित चुनावी सभाओं के संबोधित करते हुए ये बातें कही। 
का. दीपंकर ने कहा कि भोजपुर का एक हिस्सा लंबे समय से बाढ़, तो दूसरा हिस्सा सुखाड़ को झेलता रहा है। लेकिन किसी सांसद ने इन समस्याओं के निदान के लिए कुछ नहीं किया। आज जरूरी यह है कि राजू यादव जैसे उम्मीदवार को जिताया जाए, जो संसद में जाकर किसानों और मजदूरों के पक्ष में नीतियां बनाने और उनके जीवन के संकटों के समाधान के लिए संघर्ष करें। उन्होंने कहा कि जो पार्टियां नीतियो के बजाए चेहरों पर चुनाव को केंद्रित कर रही हैं, वे दरअसल उन नीतियांे को बदलना नहीं चाहतीं। भाजपा की ‘भारत विजय रैली’ की माले की रैलियों जनाधिकार रैली, परिवर्तन रैली, जनदावेदारी रैली आदि से तुलना करते हुए कहा कि रैलियों के नामकरण में भी राजनीति के फर्क को महसूस किया जा सकता है। जिस तरह माले ने सामंती-सांप्रदायिक शक्तियों के हुंकार का जवाब खबरदार रैली से दिया, उसी तरह मोदी के नेतृत्व में तानाशाही की जो आहट सुनाई दे रही है, उसका मुकाबला भी माले ही करेगी। मौकापरस्त रामविलास पासवान, नीतीश कुमार और लालू जी के वश की यह बात नहीं है।
आज सरैया बाजार में पूर्व सांसद और समाजवादी नेता रामअवधेश सिंह भी माले प्रत्याशी राजू यादव के प्रचार में उतरे। उन्होंने कहा कि राजू यादव होनहार नौजवान हैं। निश्चित तौर पर वे भोजुपर के गरीबों और मजदूर-किसानों के लिए संघर्ष करेंगे। 
इस मौके पर माले के केंद्रीय कमेटी सदस्य का. कृष्णदेव यादव ने कहा कि हैलिकाप्टर से आने वाले वर्तमान और भूतपूर्व मुख्यमंत्री और बड़े-बड़े पद ओहदा वाले लोगों से जनता की समस्याओं का हल नहीं होगा। जनता की समस्याओं का हल तो वही करेगा जो जनता के साथ मिलकर उन समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करेगा। इस लिहाज से राजू यादव से बेहतर उम्मीदवार कोई नहीं है। 
माले प्रत्याशी राजू ने कहा कि सांसद बनने पर शाहपुर-बड़हरा क्षेत्र को बाढ़ से स्थायी निदान दिलाने, अगलगी की घटनाओं पर रोक लगाने, गरीबों और किसानों को कृषि कार्य के लिए निःशुल्क बिजली, युवाओं के स्थायी रोजगार और बेरोजगारों के लिए 5000 रु. बेरोजगारी भत्ता और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष करेंगे। सभाओं को का. सुदामा प्रसाद, का. जाकिर हुसैन, का. भगीरथ यादव, का. महेश ने भी संबोधित किया। सरैया बाजार में मंच संचालन गायक-रंगकर्मी राजू रंजन ने किया।

घर-घर मोदी नहीं, घर-घर रोटी की जरूरत: दीपंकर भट्टाचार्य




लोग आर्थिक नीतियों की मार झेल रहे हैं, इन नीतियों को बदलना होगा: दीपंकर भट्टाचार्य
हत्या और विनाश के गुजरात माॅडल को विकास नहीं कहना चाहिए: कविता कृष्णन
माले प्रत्याशी राजू यादव को विजयी बनाने की जनता से अपील की गई 
संदेश/अजीमाबाद/ सहार
29 मार्च 2014
भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने आज आरा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से भाकपा-माले के युवा प्रत्याशी राजू यादव के पक्ष में संदेश, अजीमाबाद और सहार में चुनावी जनसभाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज घर-घर मोदी नहीं, बल्कि घर-घर रोजी और घर-घर रोटी की जरूरत है। मोदी के एक रथ का पहिया आरएसएस का है, जिसका काम दंगा करना और सांप्रदायिक उन्माद फैलाना है, और दूसरा पहिया अंबानी, अडानी, जिंदल-मित्तल, टाटा जैसे पूंजीपति घरानांे का है, जो हमारे जल-जंगल-जमीन और बाजार पर कब्जा कर लेना चाहते हैं। का. दीपंकर ने कहा कि किसान-मजदूर, छात्र-नौजवान जीवन के जिन संकटों को झेल रहे हैं, वह कोई प्रकृति की मार नहीं है, बल्कि महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी सत्ता और आर्थिक नीतियों की मार की वजह से है। माले उम्मीदवार इन्हीं सारे सवालों पर संघर्ष करते रहे हैं और संसद में जाकर इन्हीं सवालों पर नीतियों को बदलने की लड़ाइ्र्र लड़ेंगे। 
का. दीपंकर ने सेवानिवृत होकर तुरत किसी पार्टी का उम्मीदवार बनने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे लोग जब प्रशासन में रहते हैं, तो निश्चित तौर पर निष्पक्ष नहीं रहते होंगे। उन्होंने आरा के एक और उम्मीदवार की दलबदलू प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो सिर्फ खाने-पकाने की, स्वार्थ की राजनीति करते रहे हैं, वे भला सांसद बनकर जनता का भला कैसे कर पाएंगे?
का. दीपंकर ने राज ठाकरे और भाजपा के गठबंधन पर भी सवाल उठाया और कहा कि जो लोग बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश के नौजवानों को मारते हैं, उन्हें बिहार के नौजवान क्यों वोट देेंगे? यह दोरंगी नीति चलेगी। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में माले ने भी एक मोर्चा बनाया है, जो किसान-मजदूरों, छात्र-नौजवानों, महिलाओं, छोटे दूकानदारों, कर्मचारियों का मोर्चा है। माले के उम्मीदवार राजू यादव छात्र राजनीति से आए हैं और लोकतंत्र-इंसाफ के लिए लड़ने वाले सिपाही हैं। 
पार्टी पोलित ब्यूरो सदस्य कविता कृष्णन ने कहा कि जो सामंती ताकतें बिहार को पिछड़ा बनाए हुए हैं, वे आज भी बिहार के गरीबों, दलितों, अल्संख्यकों, मजदूरों और महिलाओं को अपने जूते तले दबाए रखने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात विकास नहीं, बल्कि हत्या का माॅडल है और जिसकी शुरुआत भाजपा ने बिहार में गरीबों, दलित-अल्पसंख्यक, महिलाआंे और बच्चों की हत्या करके की थी। उन्होंने कहा कि भाजपा के पक्ष में काम करने का मतलब सांप्रदायिक, सामंती-महिला विरोधी ताकतों की जीत होगी। निश्चित तौर पर कांग्रेस और नीतीश सरकार से लोगों में गुस्सा है, उन्हें विकल्प की तलाश है, लेकिन विकल्प भाजपा नहीं हो सकती। विनाश को विकास नहीं कहा जा सकता। केंद्रीय कमेटी सदस्य कृष्णदेव यादव ने कहा कि बिहार में अब सीधी लड़ाई है। सामंती-सांप्रदायिक ताकतों के उन्माद, उत्पात, अन्याय के खिलाफ लालू, नीतीश और रामविलास नहीं लड़ सकते। उनके साथ जाकर विकास का दावा करने वाले जनता को छलने का काम करते रहे हैं। जनता की लड़ाई का सही रास्ता वह रास्ता है, जिसे भोजपुर में जगदीश मास्टर, रामेश्वर यादव, रामनरेश राम और हाल में शहीद बुधराम पासवान दिखा गए हैं। 
माले प्रत्याशी राजू यादव ने कहा कि सांसद बनने के बाद वे डेढुंआ पंप योजना समेत सिंचाई के तमाम साधनों को दुरुस्त करने, कृषि कार्य के लिए तथा गरीबों को निःशुल्क बिजली, कुंवर सिंह विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलवाने तथा बेरोजगार नौजवानों को रोजगार भत्ता दिलवाने के लिए संघर्ष करेंगे। उन्होंने गरीबों-छात्र-नौजवानों, किसान-मजदूरों की गोलबंदी को तोड़ने की सांप्रदायिक-सामंती साजिशों से सावधान रहने की अपील की। 
संदेश में माले राज्य कमेटी सदस्य का. सुदामा प्रसाद और जाकिर हुसैन, अजीमाबाद में विमल यादव, उपेंद्र सिंह, सतीश यादव तथा सहार में कामता प्रसाद सिंह, मदन सिंह ने भी सभा को संबोधित किया। संदेश में सभा की अध्यक्षता प्रखंड सचिव का. परशुराम सिंह, अजीमाबाद में दसईं राम और सहार में रामकिशोर राय ने किया। 

माले ने राजू यादव के लिए चौतरफा चुनाव प्रचार शुरू किया



आरा: 26 मार्च 2014
जनता के मु्द्दों पर संघर्ष का इतिहास है राजू यादव का: का. कृष्णदेव यादव
माले प्रत्याशी राजू यादव ने नामांकन के बाद गोला मुहल्ला, एमपी बाग, तरी मुहल्ला, महाजन टोली में घर-घर जाकर जनसंपर्क किया और जनता से वादा किया कि उनकी जीत होगी, तो अपराध नियंत्रण, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि से संबंधित मुद्दों पर काम करेंगे।
केंद्रीय कमेटी सदस्य का. कृष्णदेव यादव ने आज पकड़ी, मौलाबाग, धरहरा, बिराहिमपुर में दौरा किया। वहां मतदाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि लगातार इस संसदीय क्षेत्र से विभिन्न पार्टियों के उम्मीदवार संसद में पहुंचे, लेकिन आरा शहर के विकास का काम अब भी अधूरा है। हर चुनाव में शिक्षा, स्वास्थ्य, नली-गली-सड़क, शुद्ध पानी, बिजली और सुरक्षा के सवाल उभर कर आते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई सांसद उन मुद्दों को छूता तक नहीं, ऐसा इसलिए होता है कि इन मुद्दों के साथ उनका कोई राजनीतिक सरोकार नहीं होता। माले के युवा प्रत्याशी इन सारे मु्द्दों पर छात्र जीवन से ही संघर्ष करते रहे हैं। भाकपा-माले और इसके उम्मीदवार- दोनों का जनता के लिए संघर्ष करने का इतिहास रहा है। राजू यादव की जीत आरा आम अवाम में खुशहाली लाएगी और पारदर्शी तरीके से विकास होगा। वे संसद में जाएंगे तो गरीब-गुरबा, मेहनतकश-अकलियत-वंचित लोगों और आम नागरिकों की आवाज संसद में पहुंचेगी और वे वहां जनविरोधी नीतियों को बदलने की लड़ाई लड़ेंगे।
माले के अगियांव विधानसभा तैयारी क्षेत्र की बैठक
हत्यारों की राजनैतिक साजिश का कारगर राजनैतिक जवाब देने का संकल्प
आज गड़हनी में अगियांव विधानसभा क्षेत्र में माले की तैयारी समिति की बैठक हुई, जिसमें चरपोखरी प्रखंड के सचिव का. बुधराम पासवान की स्मृति में एक मिनट का मौन रखा गया। जिस राजनैतिक साजिश के तहत सामंती-सांप्रदायिक-अपराधी ताकतों द्वारा उनकी हत्या की गई, उस राजनैतिक साजिश के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा जनता को संगठित करते हुए कारगर राजनैतिक जवाब देने का संकल्प लिया गया। इस हत्या के बाद प्रशासन की भूमिका के बारे में भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक में आम राय थी कि अगर प्रशासन सभी हत्यारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती, तो ऐसी स्थिति में स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयरहित चुनाव की गारंटी नहीं हो सकती। जिन हमलावर ताकतों ने गरीब-गुरबों, मजदूर-किसानों के प्रिय नेता की रात के अंधेरे में कायरतापूर्ण तरीके से हत्या की है, वे किसी स्तर से जनता का वोट हड़पने आएंगे तो उनको करारा जवाब मिलेगा। अगियांव विधानसभा क्षेत्र की जनता चुनाव का समय हो या दूसरा कोई समय नेतृत्वविहीन नहीं होगी, बल्कि का. बुधराम पासवान के साथी उनके संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। बैठक में राज्य सचिव का. कुणाल, माले प्रत्याशी राजू यादव, जिला सचिव जवाहरलाल सिंह, जिला कमेटी सदस्य रघुवर पासवान, सिद्धनाथ राम, रमेश जी, टेंगर राम, छपित राम और इनौस के महासचिव रवि राय के साथ अगियांव विधानसभा क्षेत्र के कई प्रमुख कार्यकर्ता मौजूद थे।
आइसा राजू यादव की जीत के लिए 250 छात्र-युवाओं की एक प्रचार टीम बनाने में जुटी 
इधर आइसा ने अपने महासचिव का. अभ्युदय के नेतृत्व में छात्र-युवाओं के बीच सघन बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। 30 मार्च तक बैठकों का दौर चलेगा और 31 मार्च को छात्रनेता चंद्रशेखर की शहादत दिवस के मौके पर महाराजा काॅलेज में एक छात्र-युवा संकल्प सभा होगा, जिसमें कारपोरेट लूट और सांप्रदायिक उन्माद की शक्तियों को आरा लोकसभा क्षेत्र से शिकस्त देते हुए माले के युवा उम्मीदवार राजू यादव के जरिए जनता की आवाज को संसद में भेजने का संकल्प लिया जाएगा। इन बैठकों में हजारों छात्र-युवाओं के बीच से लगभग 250 छात्र-युवा प्रचारकों की टीम बनाई जाएगी, जो चुनाव तक राजू यादव के पक्ष में मतदाताओं को गोलबंद करने के लिए पूर्णकालिक तौर पर काम करेगी। छात्र-युवाओं की यह प्रचार टीम प्रचार के नए-नए रूपों का उपयोग करेगी और घर-घर तक पहुंचेगी। 


माले प्रत्याशी राजू यादव के नामांकन में जनता का हुजूम उमड़ा



उत्साह से झूमे छात्र-नौजवान और संस्कृतिकर्मी, किसान-मजदूरों की आंखों में उम्मीद दिखी

एक दिन पहले ही पूरे जिले से माले कार्यकर्ता और समर्थक अपने प्रिय साथी और नेता बुधराम पासवान को अंतिम विदाई देने आए थे। शोक, दुख और गुस्से का माहौल था। माले प्रत्याशी राजू यादव के नामांकन की तय तिथि को एक दिन आगे बढ़ा दिया गया था। थोड़ी आशंका थी कि नामांकन के मौके पर जैसी संभावित जनजुटान की अपेक्षा थी, वैसा न हो। लेकिन माले कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सचमुच शोक को शक्ति में बदल डाला। शोक और संघर्ष की चुनौतियों की इस घड़ी में समाज के एक बहुत बड़े हिस्से ने भी माले का साथ दिया। माले प्रत्याशी राजू यादव के नामांकन के अवसर पर जो जनसैलाब उमड़ा, वह अभूतपूर्व था।
25 मार्च की सुबह से ही माले कार्यकर्ताओं, समर्थकों और किसान-मजूदरों, छात्र-नौजवानों का हुजूम उमड़ने लगा था। नामांकन के तय समय की सूचना ज्यादातर कार्यकर्ताओं और समर्थकों को ही थी। लेकिन आज नामांकन होना है, यह जानकर ही अनेक लोग स्वतःस्फूर्त तरीके से माले कार्यालय पहुंच गए। छात्र-नौजवान उत्साह और उमंग से भरे थे, तो मजदूर-किसानों के चेहरे उम्मीद से लबरेज थे। किसी प्रत्याशी के पक्ष में ऐसा जबर्दस्त माहौल पिछले कई चुनावों में मुझे देखने को नहीं मिला। 
पूर्वी गुमटी से निर्वाचन कार्यालय तक जनता का कारवां जिस उत्साह और अनुशासन के साथ पहुंचा, वह देखने लायक था। कुछ समर्थक अपने घोड़े भी लाए थे, तो कुछ बाजा-गाजा लेकर आए थे। हवा में लहराते लाल झंडे थे। माले प्रत्याशी राजू यादव, राज्य सचिव का. कुणाल, केंद्रीय कमेटी सदस्य कृष्णदेव यादव, जिला कमेटी सदस्य अशोक कुमार सिंह और अधिवक्ता अमित कुमार बंटी निर्वाचन कार्यालय के अंदर गए और पूरा जनसमूह सड़क के दोनों किनारे धैर्य के साथ खड़े होकर उनके बाहर आने का इंतजार करता रहा। 
उत्साह का यह आलम था कि आइसा राज्य सचिव अजित कुशवाहा ने डफली थाम लिया था और उस पर थापें दे रहे थे। जनकवि कृष्ण कुमार निर्मोही और राजू रंजन ने आज के राजनैतिक माहौल पर रचित जनगीतों के अलावा भोजपुर के संघर्ष के इतिहास को अपना स्वर दिया। इन गीतों में सांप्रदायिक उन्माद और देश को लूटने वाली मौकापरस्त राजनीति को शिकस्त देने का मजबूत आह्वान था। इंकलाब जिंदाबाद, लाल किले पर लाल निशान, मांग रहा है हिंदुस्तान, देश का नेता कैसा हो, राजू यादव जैसा हो आदि नारे गूंजे। का. बुधराम पासवान के साथ भोजपुर आंदोलन के तमाम शहीदों को बार-बार याद किया गया। मोदी के सपने को पूरा नहीं होने देंगे, आरा से माले के लाल निशान को संसद में भेजेंगे, गीतांे में इसका भी संकल्प था। 
नामांकन कार्यालय से बाहर आते ही माले प्रत्याशी राजू यादव को माला पहनाने के लिए जनता में होड़ लग गई। माला पहनाने वाले ठेकेदार, अपराधी, थैलीशाह नहीं थे, जैसा कि आमतौर पर होता है, बल्कि वे बिल्कुल साधारण लोग थे, महिलाएं थीं, नौजवान थे, जिनके कपड़े और चेहरे उनके मेहनतकश होने की गवाही दे रहे थे। उनकी आंखों में एक उम्मीद था कि करोड़पतियों और समाज के वर्चस्वशाली लोगों के बजाए एक ऐसा जनप्रतिनिधि संसद मंे जाएगा, जो उनकी आकांक्षा और सपनों के लिए काम करेगा। 
जनता का कारवां जिस अनुशासन के साथ नामांकन कार्यालय तक गया था, उसी तरह वापस लौटा। इस मौके पर राजू यादव ने कहा कि जिन सामंती-सांप्रदायिक-अपराधी ताकतों ने का. बुधराम पासवान की हत्या की है, उनके मंसूबे सफल नहीं होंगे। का. बुधराम पासवान के अधूरे सपनों को साकार किया जाएगा। सामंती-सांप्रदायिक-अपराधी ताकतों को संरक्षण देने वाली राजनीति को जनता की राजनीतिक दावेदारी को बढ़ाते हुए पीछे धकेल दिया जाएगा। का. राजू यादव ने कहा कि हम एक नया भोजपुर बनाएंगे, जहां अकबर खां जैसे किसी शिक्षक और बुधराम पासवान जैसे जननेता की हत्या करने की हिम्मत किसी को नहीं होगी, अगर कोई ऐसी कार्रवाई करेगा तो उसे इसकी वाजिब सजा मिलेगी। समाज में सबके लिए विकास के अवसर हों, किसी के साथ अन्याय और किसी का उत्पीड़न न हो, वे ऐसा राजनैतिक माहौल बनाएंगे। उन्होंने कहा कि आरा में जेएनयू की शाखा खुलवाने, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने, सोन नहर के आधुनिकीकरण, ढेढुआ पंप नहर परियोजना, शाहपुर-बड़हरा में बाढ़ के स्थाई निदान, तमाम सरकारी ट्यूबवेल को चालू कराने के लिए संघर्ष करेंगे। सभी गरीबों को सौ यूनिट निःशुल्क बिजली और किसानों को कृषि कार्य हेतु निःशुल्क बिजली मिले, सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों में डाॅक्टर की व्यवस्था हो, सभी बेरोजगारांे को बेरोजगारी भत्ता मिले तथा सभी गरीब टोलों में सामुदायिक भवन, स्कूल का निर्माण हो तथा उन टोलों को मुख्य सड़क से जोड़ा जाए, यह भी उनकी प्राथमिकता होगी। राजू यादव ने कहा कि महिलाओं की आजादी और बराबरी के लिए चल रहे संघर्ष को वे आगे बढ़ाएंगे। पिछले दिनों माले द्वारा चलाए गए जनसंवाद अभियान में उठे जनता के तमाम मुद्दों को वे हमेशा ध्यान में रखेंगे और देश में चल रही मजदूर-किसान, छात्र-नौजवान, महिला विरोधी नीतियों को बदलने और जनपक्षीय नीतियो के निर्माण के लिए संघर्ष करेंगे।

शोक को शक्ति में बदल देने के संकल्प के साथ माले नेता को अंतिम विदाई दी गई


का. बुधराम पासवान के अधूरे सपनों और अरमानों को पूरा करने का संकल्प लिया गया
माले नेता की हत्या की राजनीतिक साजिश का जवाब देने का आह्वान
प्रकाशनार्थ/ प्रसारणार्थ
आरा: 24 मार्च 2014
माले कार्यालय में आज सुबह से ही आरा शहर और पूरे जिले से माले नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थक अपने साथी बुधराम पासवान को अंतिम विदाई देने आरा पार्टी कार्यालय में जुटने लगे थे। का. कृष्णदेव यादव, का. नंदकिशोर प्रसाद, का. मीना तिवारी, का. कुणाल, का. सुदामा प्रसाद, का. जवाहरलाल सिंह, का. असलम, राजू यादव, अजित कुशवाहा समेत तमाम नेताओं-कार्यकर्ताओं ने दिवंगत बुधराम पासवान के शव पर माल्यार्पण किया। उसके बाद एक मिनट का मौन रखा गया और श्रद्धांजलि सभा की गई।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए राज्य सचिव का. कुणाल ने कहा कि सामंती-सांप्रदायिक-अपराधी ताकतें गरीबों, मजदूर-किसानों की आवाज को दबा देना चाहती हैं।  यही ताकतें अतीत में गरीब-मेहनतकशों को वोट नहीं डालने देती थीं। जनता ने जब संघर्ष और शहादत के बल पर वोट का अधिकार हासिल किया और अपने संघर्षों के साथियों को जनप्रतिनिधि के तौर चुनने लगी, तो जनता को आतंकित करने के लिए सामंती-सांप्रदायिक-अपराधी ताकतें उनका जनसंहार करने लगीं। जब जनसंहार से भी जनता की संगठित ताकत को तोड़ना संभव नहीं हुआ, तो अब ये ताकतें उनके नेताओं को निशाना बनाने लगी हैं। इस चुनाव में भाकपा-माले के पक्ष में बढ़ती गोलबंदी को तोड़ने के लिए ही सुनियोजित तरीके से का. बुधराम पासवान की हत्या की गई है। जिले के बेहतर माहौल को ये ताकतें बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं। बुधराम पासवान की हत्या के एक दिन पहले पीरो में एक नौजवान कोचिंग चालक अकबर खां की हत्या करके उसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई।
का. कुणाल ने कहा कि हत्यारों ने सामंती-सांप्रदायिक और अपराधी गिरोहों की लूट और अन्याय की राजनीति को बरकरार रखने के लिए यह हत्या की है और सोचा है कि ऐसा करके वे गरीब-मेहनतकश, ईमानदार व न्यायपसंद-लोकतांत्रिक लोगों की जीत की प्रबल संभावना को खत्म कर देंगे। लेकिन का. बुधराम पासवान की यादें और विरासत हमारे साथ है, उसके बल पर हम उनके अधूरे सपनों और अरमानों को पूरा करेंगे। आरा से माले की जीत निश्चित तौर पर होगी और इस हत्या के लिए जिम्मेवार अपराधियों और इसके पीछे की राजनीतिक साजिश को करारा जवाब मिलेगा। उन्होंने शोक को शक्ति में बदल देने का आह्वान किया।
का. कृष्णदेव यादव ने कहा कि का. बुधराम पासवान नए हिंदुस्तान के सपने के लिए संघर्ष करते हुए शहीद हुए हैं। उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी। 1993 में भूमि आंदोलन के दौरान पुलिस दमन के शिकार साथियों की बुधराम जी ने किस तरह पूरे एक माह तक सेवा-सुश्रुषा की थी, इसे का. जवाहरलाल सिंह ने याद किया और कहा कि वे बेहद समर्पित पार्टी कामरेड थे। अपने संवेदनशील व्यवहार के कारण वे पार्टी के साथ-साथ आम जनता में बेहद प्रिय थे। श्रद्धांजलि सभा को राज्य कमेटी सदस्य का. सुदामा प्रसाद, इनौस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का. असलम, माले प्रत्याशी का. राजू यादव, रोहतास के जिला सचिव संजय, दिल्ली राज्य कमेटी के सदस्य श्याम किशोर यादव, भोजपुर जिला कमेटी सदस्य का. क्यामुद्दीन, आरा नगर कमेटी सदस्य का. राजनाथ राम ने भी संबोधित किया। श्रद्धांजलि सभा का संचालन आरा नगर सचिव का. दिलराज प्रीतम ने किया।
श्रद्धांजलि सभा के बाद का. बुधराम पासवान की अंतिम यात्रा निकली, जो नवादा, शिवगंज, गोपाली चैक, गोला होते हुए गांगी स्थित श्मशान पहुंची। का. बुधराम पासवान का शव एक गाड़ी पर रखा हुआ था, जिसके पीछे कें्रद्रीय और राज्य स्तर के नेता थे, उनके बाद जिला कमेटी के सदस्य तथा दूर-दराज से आए तमाम माले नेता, कार्यकर्ता और समर्थक। आइसा राज्य कमेटी सदस्य का. अजित कुशवाहा का. बुधराम जी के योगदान के बारे में उद्घोषणा कर रहे थे। शेष सारे लोग मौन थे। आरा शहर में दो साल पहले गरीबों के जनसंहार रचाने वाले एक सरगना की हत्या के बाद समर्थकों ने तांडव दिया था, लेकिन आज माले नेता की शवयात्रा में शामिल लोगों के चेहरे पर अद्भुत संयम, शोक और संकल्प का भाव दिख रहा था। शवयात्रा जहां से भी गुजर रहा था, वहां आम लोग अत्यंत खामोशी के साथ माले नेता के शव और मौन जुलूस को देख रहे थे। बीच-बीच में कई लोग जुलूस में शामिल भी हो जा रहे थे। चारों ओर शोक पसरा हुआ नजर आ रहा था। का. बुधराम पासवान को अग्नि के हवाले करते वक्त हजारों लोग मौजूद थे।

का. बुधराम पासवान की हत्या एक राजनीतिक हत्या है,



यह चुनाव में गरीब-मेहनतकशों की गोलबंदी रोकने की साजिश है: का. कुणाल
जनता से हत्यारों की राजनैतिक साजिश का करारा जवाब देने का आह्वान

23 मार्च 2014
भाकपा-माले के राज्य सचिव का. कुणाल ने माले के चरपोखरी प्रखंड सचिव का. बुधराम पासवान की हत्या को राजनीतिक हत्या करार दिया है। उन्होंने कहा है कि सामंती-सांप्रदायिक-अपराधी ताकतों ने आसन्न लोकसभा चुनाव में गरीबों, मजदूर-किसानों और न्यायपसंद लोगों की बढ़ती राजनीतिक गोलबंदी से घबराकर का. बुधराम पासवान की हत्या की है। ये वही ताकतें हैं, जो गरीब-मेहनतकशों को वोट डालने नहीं देती थीं, लेकिन जनता ने संघर्ष और शहादत के बल पर उस अधिकार को हासिल किया। का. कुणाल ने कहा है कि इन सामंती-सांप्रदायिक-अपराधी ताकतों के पास जनता का कोई मुद्दा नहीं रह गया है, ये पूरे जिले में अशांति और आतंक का माहौल पैदा करके जनादेश को हड़पने की साजिश कर रही हैं। भाजपा-जद (यू) के शासनकाल में इनका मनोबल बढ़ा है और गठबंधन टूटने के बाद भी इन पर सरकार और प्रशासन का कोई अंकुश नहीं है। का. कुणाल ने जनता से इन ताकतों की राजनीतिक साजिशों का करारा जवाब देने का आह्वान किया है। 
का. कुणाल ने कहा कि एक ही दिन पहले पीरो में कोचिंग चलाने वाले एक लोकप्रिय शिक्षक अकबर खां की हत्या कर दी गई। समाज में जो भी ईमानदार और जनपक्षीय लोग हैं, जो जनता के आंदोलनों के नेता है, जो सामंती शोषण-उत्पीड़न और सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने वालों के खिलाफ लड़ते हैं, वे सब राजनीतिक संरक्षण प्राप्त इन अपराधियों के निशाने पर हैं। इसके पहले नासरीगंज में माले के रोहतास जिला सचिव का. भैयाराम यादव, औरंगाबाद के लोकप्रिय मुखिया छोटू कुशवाहा की हत्याएं भी ऐसी ही ताकतों ने की थी। आरा में भाकपा-माले कार्यकर्ता सूफियान की हत्या के लिए भी राजनीतिक संरक्षण प्राप्त ऐसे ही अपराधी जिम्मेवार थे।  
का. कुणाल ने कहा कि एक दिन बाद ही आरा लोकसभा से माले प्रत्याशी का नामांकन होना था। का. बुधराम पासवान इसी सिलसिले में एक बैठक के लिए अकेले रेपुरा जा रहे थे कि रास्ते में अपराधियों ने कायरतापूर्ण तरीके से घेरकर उन्हंे गोली मार दी। कल होने वाला माले प्रत्याशी का नामांकन अब 25 मार्च को होगा। माले पूरे सप्ताह गांव गांव में का. बुधराम की हत्या के खिलाफ संकल्प सभाएं करेगी और 30 मार्च को अंतिम संकल्प सभा चरपोखरी में होगी, जिसे पार्टी के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य संबोधित करेंगे। जनता का. बुधराम की हत्या के राजनीतिक साजिशकर्ताओं के मंसूबों को निश्चित तौर पर धूल चटाएगी। 

मजदूर किसानों के बीच बेहद लोकप्रिय थे का. बुधराम
का. बुधराम पासवान रेपुरा गांव के ही निवासी थे। लगभग 45 वर्ष की उनकी उम्र का बड़ा हिस्सा भाकपा-माले के कार्यकर्ता और संगठक के रूप में गुजरा। अस्सी के दशक में उनका जुड़ाव पार्टी के साथ हुआ था। उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक लड़का और दो लड़की है। उन्होंने स्नातक तक पढ़ाई की थी। पिछले डेढ़ दशक से वे भाकपा-माले के चरपोखरी प्रखंड के सचिव थे और भोजपुर जिला कमेटी के सदस्य थे। उन्होंने गरीब-भूमिहीनों के भूमि आंदोलन, बंटाईदारों और छोटे किसानों के आंदोलन, उचित मजदूरी, मनरेगा, शराबबंदी, बिजली आदि कई मुद्दों पर आंदोलनों का नेतृत्व किया। नगरी जनसंहार के दोषियों के खिलाफ गवाही देने वालों बहादुर मजदूर-किसानों ने उनका नेतृत्व पाया। वे बेहद सौम्य निर्भीक और कर्मठ कार्यकर्ता थे। किसी से उनकी व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी। उन्होंने जनता के जनतांत्रिक सवालों पर उभरे कई आंदोलनों का नेतृत्व किया और कई बार पुलिसिया दमन भी झेला। वे मजदूर किसानों के बीच बेहद लोकप्रिय थे। 


पूरे जिले में आक्रोश 
आज सुबह का. बुधराम पासवान की हत्या की सूचना मिलते ही गरीबों और मजदूर-किसानों में आक्रोश भड़क उठा। अगियांव में ननऊर, कोईलवर में अखगांव, सहार में अंधारी, पीरो में हसवाडिह, तरारी में जेठवार और फतेहपुर, जगदीशपुर में इसाढ़ी और नयका टोला और संदेश प्रखंड के संदेश बाजार समेत जिले के कई जगहों में आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर दिया। आरा में छात्र-नौजवानों और संस्कृतिकर्मियों ने भगतसिंह की शहादत के मौके पर पूर्व घोषित सेमिनार को रद्द करते हुए का. बुधराम पासवान की हत्या के खिलाफ एक प्रतिवाद मार्च निकाला। मार्च के दौरान जनमत के संपादक सुधीर सुमन और आइसा राज्य सचिव का. अजीत कुशवाहा ने भगतसिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और का. बुधराम पासवान की को भगतसिंह की शहादत की पंरपरा से जोड़ा। प्रतिवाद मार्च गोपाली चैक पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया, जिसे का. दिलराज प्रीतम, का. क्यामुद्दीन और सुधीर सुमन ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि हत्यारे पूरे देश में नंगा नाच रहे हैं और जननेताओं की हत्या हो रही है। का. बुधराम पासवान शोषण, लूट और अपराध के बल पर कायम राजनीतिक संस्कृति में बदलाव के लिए लड़ने वाले एक जनप्रिय नेता थे। वे वास्तविक जनतंत्र के लिए छेड़े गए का. जगदीश मास्टर, रामेश्वर अहीर और का. रामनरेश राम की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले कामरेड थे। जिस तरह सत्तर के दशक में नेताओं की शहादत के बावजूद उनकी लड़ाई को शासकवर्ग खत्म नहीं कर पाया, उसी तरह का. बुधराम पासवान की हत्या के बावजूद हत्यारों का राजनीतिक मंसूबा पूरा नहीं होगा। जनता उन्हें करारा जवाब देगी। 
आज सुबह राज्य कमेटी सदस्य का. सुदामा प्रसाद, पूर्व विधायक चंद्रदीप सिंह और अरुण सिंह, इनौस के उपाध्यक्ष का. असलम, माले जिला सचिव का. जवाहरलाल सिंह, माले प्रत्याशी राजू यादव, खेमस नेता कामता प्रसाद सिंह, रघुवर पासवान, विंदेश्वरी जी घटनास्थल पर पहुंचे और का. बुधराम पासवान के शोकसंतप्त परिजनों से मिले। उसके बाद का. बुधराम पासवान का शव भाकपा-माले जिला कार्यालय, आरा में लाया गया।