Wednesday, April 9, 2014

रामनवमी में मोदी मुखौटे का इस्तेमाल आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन: का. कुणाल

चुनावी फायदे के लिए धर्म के इस्तेमाल पर आयोग से कार्रवाई की मांग


आरा: 8 अप्रैल 2014 
एक सिटी चैनल पर रामनवमी जुलूस के दौरान मोदी के मुखौटे वाली तस्वीर 
भाकपा-माले के राज्य सचिव का. कुणाल ने रामनवमी के अवसर पर निकाले गए शोभायात्रा में नरेंद्र मोदी के मुखौटों और बैच के इस्तेमाल को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से चुनावी फायदे के लिए धर्म के दुरुपयोग का मामला है, इसके खिलाफ आयोग को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। का. कुणाल ने कहा है कि आरा में सारे पर्व-त्योहारों को शांतिपूर्ण ढंग से मनाने की परंपरा रही है, लेकिन विगत एक दशक में भाजपा के नेतृत्व में सामंती-सांप्रदायिक ताकतों ने इन त्योहारों को आक्रामक शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बना डाला है। इनका धर्म के मर्म से कुछ लेना देना नहीं, बल्कि इसकी आड़ में ये अपना राजनीतिक स्वार्थ साधना और अपना आतंक कायम करना चाहते हैं। खासकर इस दौरान मुस्लिम इलाकों में भाजपाई कार्यकर्ता जिस तरह जानबूझकर आक्रामक तरीके से प्रचार चलाते हैं, उसका मकसद हमेशा तनाव भड़काना रहता है। 
दैनिक आज 
का. कुणाल ने कहा है कि यह 1857 के साम्राज्यवादविरोधी संघर्ष का शहर है, जिसने वीर कुंवर सिंह के नेतृत्व में हिंदू-मुस्लिम एकता के बल पर अंगरेजों को चुनौती दी थी। लेकिन उस विरासत को भाजपाई लगातार नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। आरा विधानसभा से भाजपा की जीत के बाद से तीन बार इस शहर में सांप्रदायिक दंगा फैलाने की कोशिश की जा चुकी है, जिसे यहां की संघर्षशील जनता ने अपनी एकता के बल पर नाकाम कर दिया। तनाव के ऐसे मौकों पर दोनों समुदायों को संगठित कर सांप्रदायिक ताकतों के मंसूबों को ध्वस्त करने में भाकपा-माले के शहीद कामरेड सूफियान की भी बहुत बड़ी भूमिका रहती थी। 
का. कुणाल ने कहा है कि मोदी और भाजपा राम के नाम पर सांप्रदायिक कत्लेआम करने और देश व जनतंत्र को तोड़ने वाले हैं, ये लोगों की धार्मिक आस्था का सांप्रदायिक इस्तेमाल करते हैं, इसलिए राम के प्रति आस्था और श्रद्धा रखने वालों को इनसे सावधान रहना चाहिए। 

माले का चुनाव प्रचार अभियान
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष अकबर चौधरी ने माले प्रत्याशी राजू यादव के पक्ष में प्रचार किया
दैनिक हिंदुस्तान 
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, छात्र संघ के अध्यक्ष अकबर चैधरी भी माले प्रत्याशी राजू यादव के पक्ष मे प्रचार करने के लिए आरा पहंुच चुके हैं। आज उन्होंने बेगमपुर और मिल्की मुहल्ला में नागरिकों की बैठकों को संबोधित करते हुए कहा कि जो पार्टियां मुस्लिमों को वोट बैंक समझती रही हैं और जो पार्टियां उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के बजाए भय और आतंक का वातावरण पैदा करके उनका वोट हड़पना चाहती हैं, उनसे सावधान रहना होगा। उन्होंने कहा कि भाकपा-माले हमेशा ही मुस्लिम समुदाय के जनतांत्रिक अधिकारों के लिए लड़ती रही है। इसने वोट बैंक की तरह मुस्लिमों के साथ व्यवहार नहीं किया है, बल्कि अपने नेतृत्व में चले जनांदोलनों का अनिवार्य हिस्सा माना है। सेकुलरिज्म इसके लिए चुनावी रणनीति मात्र नहीं है, बल्कि यह इस पार्टी का उसूल रहा है, यही पार्टी है जो सांप्रदायिक धु्रवीकरण की खतरनाक राजनीति से सीधे मुठभेड़ करते हुए अल्पसंख्यकों के उपर किए जाने वाले हर हमले का प्रतिवाद और प्रतिरोध किया है। बिहार में फारबिसगंज, दरभंगा से लेकर जहानाबाद तक मुस्लिम नौजवानों को फर्जी मामलों में फंसाये जाने और यातनाएं देने का मुखर विरोध इसी पार्टी ने किया है।
इस बीच केंद्रीय कमेटी सदस्य का. कृष्णदेव यादव ने गोठउला, जमीरा, धुंधुआ, भकुरा, पिरौंटा, गंगहर, कुडि़या आदि में राजू यादव के पक्ष में कई बैठकें कीं।  

Tuesday, April 8, 2014

लोजपा अल्पसंख्यक सेल छोड़कर माले में शामिल


रामविलास जी का चिराग अपने ही बंगले को आग लगा रहा है
लोजपा छोड़कर माले में शामिल हुए लोजपा अल्पसंख्यक सेल के राज्य उपाध्यक्ष ने कहा 
रामविलास जी गरीबों की झोपड़ी जलाने वालों के साथ हो चुके हैं,
माले के पक्ष में बड़ा सामाजिक गठबंधन बन रहा है: सुदामा प्रसाद 

आरा: 7 अप्रैल 2014
दैनिक आज 
आज लोजपा अल्पसंख्यक सेल के जिला अध्यक्ष सह प्रदेश उपाध्यक्ष नसीम अंसारी, लोजपा के खंडौल पंचायत के अध्यक्ष ओमप्रकाश चैधरी और संदेश प्रखंड कमिटी सदस्य संजय सिंह भाकपा-माले में शामिल हो गए। नसीम अंसारी ने बताया है कि अल्पसंख्यक सेल के राज्य महासचिव मशकूर आलम, लोजपा नगर अध्यक्ष अलाउद्दीन समेत कई लोग माले में शामिल होने वाले हैं। इस मौके पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए माले राज्य कमेटी सदस्य का. सुदामा प्रसाद ने कहा कि हमारी पार्टी पिछले पैंतालीस सालों से गरीब-मेहनतकशों, दलित-अल्पसंख्यक-पिछड़ों के हक अधिकार के लिए सामंती-सांप्रदायिक-अपराधी ताकतों के खिलाफ संघर्ष कर रही है। इस बार के चुनाव में फिर 1989 की तरह माले के पक्ष में एक व्यापक सामाजिक गठबंधन की संभावना बन रही है। गुजरात जनसंहार करने वालों के साथ जाकर रामविलास पासवान ने साबित कर दिया है कि वे अमीरों और सांप्रदायिक ताकतों के नेता हैं, इसीलिए अल्पसंख्यकों, दलितों और गरीबों का उनसे मोहभंग हो रहा है। रामविलास जी गरीबों की झोपड़ी का अंधेरा दूर करने वाले नहीं है, बल्कि झोपड़ी जलाने वालों के साथ हैं। रामविलास जी उनके साथ गए हैं, जो कभी बाबरी मस्जिद ढाहते हैं और कभी रोहतास के बड्डी गांव में रविदास का मंदिर को तोड़ते हैं और दलितों पर हमला करते हैं। 
दैनिक हिंदुस्तान 
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नसीम अंसारी ने कहा कि लोजपा में सिर्फ सामंती-सांप्रदायिक और अपराधी ताकतों की पूछ है। जिस तरह के सामंती-अपराधी उम्मीदवारों को रामविलास जी ने आरा क्षेत्र से खड़ा किया, उसे लेकर पहले से ही समर्थकों में क्षोभ था। अब भाजपा के साथ उनके चले जाने से लोजपा समर्थक गरीबों और अल्पसंख्यकों में भारी नाराजगी है।  आज रामविलास पासवान कह रहे हैं कि गुजरात जनसंहार को भूल जाओ, कल को कहेंगे कि बाथे-बथानी को भूल जाओ। हम इसे कभी भूल नहीं सकते। हमने तय किया है कि हम माले के प्रत्याशी राजू यादव को जिताकर दिल्ली पहुंचाएंगे, माले के साथ रहकर ही न्याय और विकास को हासिल किया जा सकता है। नसीम अंसारी ने कहा कि लोजपा को रामविलास नहीं, बल्कि सूर्यभान और रामा सिंह चला रहे हैं। हम राजद को देख चुके हैं, उसके साथ नहीं जा सकते थे। जद-यू में भी वही लोग हैं, जो भाजपा में थे। अब लोजपा को भी गरीबों की झोपड़ी की चिंता नहीं रह गई है। रामविलास जी का चिराग ऐसा चिराग है जो अपने ही बंगले में आग लगा रहा है।

माले का चुनाव प्रचार जारी
इस बीच माले का चुनाव प्रचार बदस्तुर जारी है। शोभा मंडल और राजमति कुंवर ने सहार, मथुरापुर, डिहरी टोला, नवादा, पतरिंहा, वंशी डिहरी, बरूंही, सहार टोला आदि में महिलाओं की पंद्रह बड़ी बैठकें करके राजू यादव के पक्ष में मतदान की अपील की। राज्य कमेटी सदस्य का. सुदामा प्रसाद ने कौलाडिहरी, चौंरी, गुलजारपुर, पेरहाप, अनुआ, इनुरखी में तथा माले राज्य सचिव का. कुणाल ने एकवारी में बड़ी चुनावी बैठकों की और गरीबों के मतदान को बाधित करने वाले हर किस्म के तत्वों के खिलाफ संगठित होकर एक-एक वोट राजू यादव के पक्ष में डालने की अपील की। 

Monday, April 7, 2014

माले प्रत्याशी राजू यादव के पक्ष में सघन चुनाव प्रचार जारी

भारी जनसमर्थन का दावा
आरा: 06 अप्रैल 2014
भाकपा-माले प्रत्याशी राजू यादव के पक्ष में सघन प्रचार जारी है। आज राजू यादव ने अगिआंव, एकवना, बनकट, भगवानपुर, चवरियां, अहिले, पोसवां, खेड़ी, पवार, मेघरिया, बड़गांव, नाढ़ी, नोनउर, मुदफ्फरपुर में चुनावी सभाओं को संबोधित करते हुए जनता को तबाह कर रही नीतियों को बदलने के लिए माले को वोट देने की अपील की।
आइसा के महासचिव अभ्युदय और तारिक ने छोटकी सासाराम और अबरपुल छात्र-नौजवानों की सभाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आरा लोकसभा क्षेत्र में राजू यादव एकमात्र ऐसे प्रत्याशी हैं, जो छात्र-नौजवानों के जीवन के संकटों को समझते हैं और उनकी समस्याओं के लिए संघर्ष करते रहे हैं। युवाओं को समझौतापरस्त अवसरवादी जनप्रतिनिधियों को मजबूती से नकारना होगा और नौजवानों की ईमानदार और जुझारू आवाज राजू यादव को संसद में भेजना होगा। 
इधर महिला संगठन ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने लछनपुर, जमीरा, अलीपुर, धरहरा में सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि गरीबों और नौजवानों में राजू यादव के प्रति जबर्दस्त आकर्षण दिख रहा है। 
दैनिक आज 
दैनिक हिंदुस्तान 
राज्य सचिव का. कुणाल ने पड़ुरा रामपुर, रेपुरा, त्रिकौल, अहपुरा में बड़ी बैठकें कीं। उन्होंने बताया कि नौजवानों का मानना है कि माले ही ऐसी पार्टी है, जो हर संकट में लोगों के साथ खड़ी नजर आती है, इसलिए वे उसे ही वोट देंगे। त्रिकौल में लोगों ने बताया कि माले जब बिजली के लिए उनके आंदोलन में शामिल हुई, तभी प्रशासन ने उनकी बात सुनी थी। इन गांवों में दलित-अल्पसंख्यक-पिछड़े नौजवान राजू यादव के पक्ष में संगठित हो रहे हैं। अहपुरा में लोगों का एक दलबदलू प्रत्याशी के बारे में कहना था कि वे ऐसे खूंटाकबार प्रत्याशी को वोट नहीं देंगे, जिसका भरोसा ही नहीं है कि चुनाव जितने के बाद किससे मिल जाएगा। राजू यादव चूंकि लगातार जनता के आंदोलनों के साथ रहे हैं, इसलिए उनका भरोसा है कि वे संसद से लेकर सड़क तक जनता के संघर्षों का साथ देंगे। 
भाकपा-माले के केंद्रीय कमेटी सदस्य का. कृष्णदेव यादव, राज्य कमेटी सदस्य का. सुदामा प्रसाद, इंकलाबी नौजवान सभा के महासचिव रवि राय, माले जिला सचिव का. जवाहरलाल सिंह, आइसा के राज्य सचिव अजीत कुशवाहा समेत भाकपा-माले के तमाम जिला स्तरीय-प्रखंड-पंचायत स्तरीय नेता कार्यकर्ता माले प्रत्याशी के पक्ष में सघन चुनाव प्रचार चला रहे हैं। 

शाहपुर में माले प्रत्याशी ने चुनाव कार्यालय का उद्घाटन किया


सामाजिक न्याय और बदलाव की वास्तविक राजनीतिक धारा का असर शाहपुर में नजर आ रहा है: राजू यादव

माले प्रत्याशी राजू यादव ने शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में चुनावी सभाओं को संबोधित किया।
प्रकाशनार्थ
आरा: 4 अप्रैल 2014
भाकपा-माले के प्रत्याशी राजू यादव ने आज बेलवनिया, दामोदरपुर, जवइनियां, करजा, लालू डेरा, रंडाडिह और शाहपुर में चुनावी सभाओं को संबोधित किया। इसी दौरान शाहपुर में चुनाव कार्यालय का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चुनाव कार्यालय का ही उद्घाटन नहीं है, बल्कि शाहपुर क्षेत्र में गरीब-दलित-पिछड़े-कमजोर-अल्पसंख्यक वर्ग के पक्ष में सामाजिक न्याय और सामाजिक बदलाव की वास्तविक राजनीतिक धारा के मजबूत होने का भी संकेत है।
उन्होंने कहा कि भाकपा-माले समाज को जनतांत्रिक बनाने और राजसत्ता व व्यवस्था को जनपक्षीय बनाने के लिए संघर्ष चला रही है। कृषि संकट पैदा करने वाली नीतियों को बदलकर किसान-मजदूरों की जिंदगी में खुशहाली लाने, छात्र-नौजवानों के लिए बेहतर शिक्षा, रोजगार और विकास के अवसरों को सृजित करने तथा महिलाओं की सुरक्षा, आजादी और समानता के अधिकार के लिए भाकपा-माले प्रतिबद्ध है।
राजू यादव ने कहा कि भाकपा-माले के पक्ष में जनसमर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है। शाहपुर क्षेत्र में भी जनता में जबर्दस्त उत्साह है। लोग यह महसूस कर रहे हैं कि दूसरी पार्टियां ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दे रही हैं, जिनका जनता के लिए आंदोलन और संघर्ष का कोई इतिहास नहीं है, जिनका अपनी राजनीतिक पार्टियों और उसके घोषित उसूलों के अनुरूप भी आचरण नहीं है। चुनाव जीतकर जनता से लगातार कटे रहने वाले लोग हों या राजनीति को महज अपनी स्वार्थपूर्ति का माध्यम बनाने वाले दलबदलू अवसरवादी लोग या फिर अचानक आसमान से टपक कर सीधे मतदाताओं पर लाद दिए गए लोग हों, उनसे पूरे बिहार की जनता उब चुकी है। आरा लोकसभा में भी यही प्रवृत्ति दिख रही है। जाहिर है ऐसी परिस्थितियों में जनता भाकपा-माले की ओर ज्यादा आकर्षित हो रही है।
राजू यादव ने कहा कि सांसद बनने के बाद शाहपुर-बड़हरा इलाके में बाढ़ की समस्या का निदान उनकी प्राथमिकता होगी। खेती और पशुपालन और उससे जुड़े व्यवसायों को समृद्ध बनाने के लिए वे संघर्ष करेंगे। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय को कंेद्रीय  विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के साथ-साथ वे शैक्षणिक दृष्टि से उपेक्षित आरा लोकसभा के तमाम क्षेत्रों में बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने के लिए प्रयास करेंगे। आरा लोकसभा क्षेत्र में उद्योगधंधों के विकास की संभावनाओं और सहकारिता संबंधी प्रयोगों को भी वे प्रोत्साहित करेंगे, ताकि नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर सृजित हो सके। 

किसान-मजदूरों के हक में नीतियां बनाने का संघर्ष माले ही कर सकती है: कृष्णदेव यादव


जो पूंजीपतियों के हित मे आम जनता को आतंकित कर रहे, उनको मतदाता शिकस्त दें: कृष्णदेव यादव

आरा: 5 अप्रैल 2014
भाकपा-माले के केंद्रीय कमेटी के सदस्य का. कृष्णदेव यादव ने आज शाहपुर विधान सभा क्षेत्र के चारघाट और रुद्रपुर में लोकसभा चुनाव में माले प्रत्याशी राजू यादव की पक्ष में चुनावी जनसभाएं कीं। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन में 23 साल की उम्र में शहादत देने वाले महान इंकलाबी और विचारक भगतसिंह ने छात्र-नौजवानों से कहा था कि किसान और मजदूर ही इंकलाब की असली ताकत हैं, उन्हें संगठित करो। उनकी ताकत के बल पर ही हम एक आजाद और समाजवादी देश बना सकते हैं। लेकिन इस देश की शासकवर्गीय पार्टियों ने किसान-मजदूरों की ताकत को कमजोर किया और साम्राज्यवादी और पूंजीवादी ताकतों से गठजोड़ बनाए रखा, समाज के सामंती ढांचे को खत्म करके उसे जनतांत्रिक नहीं बनाया। मगर भोजपुर ने इंकलाब के लिए अपनी शहादत देने वालों को याद रखा और सत्तर के दशक में वास्तविक जनतंत्र के लिए जुझारू संघर्ष शुरू किया। सत्तर के दशक के नौजवानों ने भोजपुर को इंकलाब की जमीन के रूप में सारी दुनिया में मशहूर कर दिया। आज शासकवर्गीय राजनीति जिस पतन के कगार पर पहुंच गई है, उससे मुक्ति का रास्ता भी भोजपुर के छात्र-नौजवान और मजदूर किसान ही दिखा रहे हैं। माले प्रत्याशी राजू यादव इन्हीं परिवर्तनकामी ताकतों के प्रतिनिधि हैं। 
का. कृष्णदेव यादव ने कहा कि मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए पूंजीवादी घराने आतुर हैं। उन्हें लगता है कि उनके प्रधानमंत्री बनने से उनको किसानों, आदिवासियों की जमीन और देश के प्राकृतिक संसाधनों को हड़पने में आसानी होगी। गुजरात में उन्होंने उनको लूट की जैसी छूट दी है वैसी ही उनको पूरे देश में छूट मिल जाएगी। मोदी चुनाव में जीत के लिए खुलकर सांप्रदायिक-सामंती घृणा भड़का रहे हैं, बिहारी नौजवानों को प्रताडि़त करने वाली क्षेत्रीय उन्माद की ताकतों के साथ एकता बना रहे हैं। भारतीय जनता की एकता को तोड़कर पूंजीपतियों के हाथ देश बेचने की इस भाजपाई साजिश को उन्हें चुनाव में शिकस्त देकर करारा जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की असली समस्या आतंकवाद नहीं है, बल्कि आतंकवाद की आड़ में पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए भारतीय जनता पर जो शासकीय आतंक ढाया जा रहा है, उससे निबटने का सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है। 
सत्रह साल तक बिहार में भाजपा को मजबूत बनाने वाली जद-यू और अब लोजपा तथा कांग्रेस के आगे समर्पण कर चुकी राजद, जो खुद बिखराव का शिकार है, वह भाजपा को नहीं रोक सकती। कांग्रेस की राजनीति भाजपा की खतरनाक राजनीति का विकल्प नहीं हो सकती, यह साबित हो चुका है। भाजपा नाम भले विकास का ले रही है, लेकिन बिहार में जद-यू के साथ सरकार में रहते हुए वह लगातार जनता के सवालों से भागती रही और जनता के तमाम आंदोलनों के दमन में साझीदार रही। अकेले भाकपा-माले है, जो किसान, मजदूरों, छात्र-नौजवानों, महिलाओं के सवालों पर लड़ती रही है। हाल में बिजली की कीमत में प्रस्तावित वृद्धि और सरकार की शराब नीति के खिलाफ माले ने जोरदार आंदोलन किया। सोन नहर के आधुनिकीकरण, नहरों की उड़ाही, डीजल अनुदान, धान क्रय केंद्र खुलवाने, बंटाईदार किसानों के धान की भी खरीद के लिए माले ने आंदोलन किया है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा समेत तमाम मुद्दों पर माले ही संघर्ष चला रही है। जाहिर है कि माले के प्रत्याशी राजू यादव की जीत होगी, तो इन मुद्दों पर संसद में आवाज उठेगी। आम किसानों और मजदूरों की स्थिति को बेहतर बनाने का एकमात्र विकल्प यह है कि चुनाव में माले को विजयी बनाया जाए।
अशोक कुमार सिंह, भाकपा-माले जिला कार्यालय द्वारा जारी 


आर्थिक नीतियों में बदलाव के साथ समाज और राजनीति को भी बदलना होगा: का. कृष्णदेव यादव



किसानों-मजदूरों की दुर्दशा के लिए जिम्मेवार नीतियों को बदलना होगा, झूठे विज्ञापनबाजी से समाधान संभव नहीं: कृष्णदेव यादव
माले का प्रधान कार्यालय खुला 
आरा: 2 अप्रैल 2014
भाकपा-माले के केंद्रीय कमेटी के सदस्य का. कृष्णदेव यादव ने आज मलथर, नीमा, कसाप और बीरमपुर में बड़ी चुनावी बैठकों और एड़ौरा में जनसभा की। इन बैठकों और सभा में उपस्थित लोेगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसान-मजदूरों की दुर्दशा के लिए कांग्रेस-भाजपा और उनके सहयोगी दलों की आर्थिक नीतियां दोषी हैं। कुछ पूंजीवादी घरानों और कंपनियों के मुनाफे और लूट के लिए ये पार्टियां नीतियां बना रही हैं। इसीलिए भाकपा-माले ने इनके खिलाफ संघर्ष का नारा दिया है- खेती, खेत किसान बचाओ, कारपोरेट लूट का राज मिटाओ, क्योंकि अगर इन नीतियों को बदला नहीं गया तो किसानों-मजदूरों की जिंदगी के संकट और बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि गांवों के नौजवान कब तक रोजगार के लिए पलायन करते रहेंगे, शिक्षा, रोजगार और विकास के लिए उन्हें बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेवार नीतियों के खिलाफ लड़ना होगा। मजदूरों को इसके लिए सवाल उठाना पड़ेगा कि उनके लिए सरकार ने जो वादे किए थे, वे पूरे क्यों नहीं हुए? क्यों उन्हें सौ दिन रोजगार नहीं मिला? 
का. कृष्णदेव यादव ने कहा कि भाजपा को पूंजीपतियों की भारी मदद मिल रही है। उसी पैसे से मोदी की महंगी रैलियां हो रही हैं और अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन छप रहे हैं, टीवी चैनलों पर चैबीसों घंटों प्रचार चल रहा है। भाजपा से यह पूछा जाना चाहिए कि इसका पैसा कहां से आ रहा है? और यह भी पूछा जाना चाहिए कि उन विज्ञापनों में महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, बिजली आदि समस्याओं के समाधान करने के जो वादे किए जा रहे हैं, उनका समाधान किन नीतियों से होगा? उन्होंने कहा कि भाजपा किसान-मजदूरों, छात्र-नौजवानों सबको धोखा दे रही है। उसकी सरकार बनी तो न केवल सांप्रदायिक-सामंती उन्माद और उत्पीड़न बढ़ेगा, बल्कि यूपीए सरकार की उन नीतियों को और सख्ती से आगे बढ़ाया जाएगा, जिनसे आम जनता परेशान है। उन्होंने कहा कि गुजरात में भी सड़क, बिजली आदि की समस्याएं हैं, वहां भी आदिवासियों-किसानों को जमीन से बेदखल किया जा रहा है। सिर्फ अंबानी, आडवाणी, टाटा जैसे पूंजीपतियों के लिए वह बेहतर राज्य है, इसलिए पूंजीवाद मीडिया गुजरात की विकसित छवि को लगातार प्रचारित कर रही है। 
उन्होंने कहा कि जनता की दुर्दशा के लिए जिम्मेवार आर्थिक नीतियों को बदलने के साथ-साथ समाज और राजनीति को भी बदलने की जरूरत हैै। भाकपा-माले इन नीतियों को बदलने के लिए जिस बड़ी लड़ाई छेड़े हुए है, यह चुनाव भी उसी का हिस्सा है। इसमें माले की जीत इन जनविरोधी नीतियों और विषमता पर आधारित समाज को बदलने की लड़ाई को मजबूती प्रदान करेगी। राजू यादव की जीत होगी, तो वे हमेशा जनता के बीच रहेंगे। उनके सवालों पर संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह संघर्ष करेंगे। 
इस बीच आज आरा के मील रोड में भाकपा-माले का प्रधान चुनाव कार्यालय खुल गया है। जिले भर में चुनाव कार्यालय खुलने का सिलसिला जारी है। 

सामंती ताकतें माले प्रत्याशी राजू यादव के पक्ष में बढ़ रहे जनसमर्थन से बौखला गई हैं: का. कुणाल


महादलित-दलित-अल्पसंख्यक मतदाताओं के साथ मारपीट और धमकी की घटनाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग

आरा: 1 अप्रैल 2014
भाकपा-माले के राज्य सचिव का. कुणाल ने आरा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में सामंती ताकतों और दबंगों  द्वारा महादलित-दलित-अल्पसंख्यक समुदायों और कमजोर वर्ग के मतदाताओं के साथ वोट देने के सवाल पर मारपीट करने और डराने धमकाने की घटनाओं को लोकतंत्र विरोधी बताते हुए प्रशासन से ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेवार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि नामांकन से पूर्व माले के जिला कमेटी सदस्य बुधराम पासवान की हत्या और अब चुनाव प्रचार के दौर में दलित-महादलित-अल्पसंख्यक मतदाताओं के साथ मारपीट की घटनाएं एक ही राजनैतिक मंशा से पे्ररित हैं। 
का. कुणाल ने कहा कि बभनगांवा और दिउल में दलित, जहनपुर में महादलित तथा मसाढ़ में अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के साथ मारपीट की गई है। इन घटनाओं की जांच-पड़ताल से पता चला है कि भाकपा-माले प्रत्याशी के प्रति बढ़ रहे जनसमर्थन से बौखलाकर सामंती ताकतें इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रही हैं। बभनगांवा में जिन पर हमला किया गया, वे माले के समर्थक हैं। दिउल में पासवान समुदाय के लोग बिहार सरकार की जमीन पर रहते रहे हैं, लेकिन सामंती मिजाज के लोगांे ने यह कहते हुए उनके साथ मारपीट की, कि रहते हो हमारी जमीन पर और वोट दोगे माले को? इसी तरह मसाढ़ में तुरहा समुदाय के मतदाताओं ने जब यह कहा कि वे वोट किसको देंगे, अभी तय नहीं नहीं किया है, तो सामंतों ने यह कहते हुए कि पूरा गांव भाजपा को वोट दे रहा है और तुमलोगों ने अभी तय नहीं किया है, उन्हें लाठी-डंडे से पीटा। जहनपुर में भी महादलित समुदाय के माले समर्थकों को दबंगों ने धमकी दी है। 
का. कुणाल ने कहा है कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयरहित चुनाव संपन्न हों, इसके लिए सामंती ताकतों और दबंगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। भोजपुर में गरीब-दलित-अल्पसंख्यक और कमजोर वर्ग के मतदाताओं के वोट देने के संवैधानिक अधिकार के लिए माले ने लंबा संघर्ष चलाया है। इस चुनाव में भी वे आजादी और निर्भीकता से अपने पसंद के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर सकें, इसके लिए माले हरसंभव प्रयास करेगी। दलित-महादलित-अल्पसंख्यक और कमजोर वर्ग के मतदाताओें के वोट देने का अधिकार सुनिश्चित हो इसके लिए भाकपा-माले निर्वाचन आयोग से भी इस तरह के मामलों में हस्तक्षेप करने की मांग करेगी।